सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के खनन एवं भूतत्व विभाग ने मानसून के बाद बालू खनन को दोबारा शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत, पटना, मधुबनी, रोहतास, सारण और औरंगाबाद सहित पाँच जिलों में करीब आधा दर्जन नदी घाटों की बंदोबस्ती (नीलामी) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग ने इस प्रक्रिया को सितंबर के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
प्रमुख नदियों के घाट शामिल
जिन नदी घाटों की नीलामी हो रही है, उनमें गंगा, सोन, पुनपुन, दर्धा, कमला, भूतही बलान और मुनहारा जैसी प्रमुख नदियाँ शामिल हैं। ये वे घाट हैं जिन्हें पहले के बंदोबस्तधारियों ने छोड़ दिया था या जिनकी बंदोबस्ती नहीं हो पाई थी। राज्य में फिलहाल 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू खनन पर रोक है। ऐसे में, विभाग का प्रयास है कि मानसून की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद इन घाटों से नए सिरे से खनन शुरू किया जा सके। इससे बालू की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और निर्माण कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होंगी।
अवैध खनन पर कार्रवाई
इसी बीच, सरकार ने अवैध बालू खनन और उसके भंडारण को बढ़ावा देने के आरोप में चार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों में तीन खान निरीक्षक और एक तत्कालीन खनिज विकास पदाधिकारी शामिल हैं।
मोतिहारी में खनिज विकास पदाधिकारी रागिनी कुमारी पर आरोप है कि उनके संज्ञान में अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन खान निरीक्षक अंजनी कुमार पर यह आरोप है कि उन्होंने अवैध बालू खनन, परिवहन और भंडारण को रोकने के बजाय उसे बढ़ावा दिया।सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि वह अवैध खनन को लेकर गंभीर है और ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई बालू माफियाओं और उनके साथ मिलीभगत करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर एक बड़ा प्रहार है।
आगे की राह
इस नीलामी प्रक्रिया के पूरा होने से राज्य में बालू की आपूर्ति सुचारू रूप से चल पाएगी। साथ ही, सरकार की अवैध खनन के खिलाफ मुहिम भी जारी है। एक तरफ जहाँ घाटों की बंदोबस्ती से राजस्व में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों पर की गई कार्रवाई से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। खनन विभाग की इन कोशिशों से उम्मीद है कि बिहार में बालू खनन एक व्यवस्थित और कानूनी तरीके से हो पाएगा, जिससे पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा और सरकार के खजाने में भी इजाफा होगा। यह कदम भविष्य में राज्य में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है।