सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक पर कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म निर्माता नीरज पांडे और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से जवाब तलब किया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की बेंच ने स्पष्ट किया कि विवाद पैदा करने के लिए ऐसे आपत्तिजनक शीर्षक चुनना गलत है।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ;
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने फिल्म निर्माताओं को नसीहत देते हुए कहा है कि किसी भी वर्ग को अपमानित करना गलत है। समाज में पहले से ही काफी मतभेद हैं, फिल्मों को इसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए। बेंच ने टिप्पणी की कि अक्सर विवाद पैदा करने और पब्लिसिटी पाने के उद्देश्य से ऐसे नाम रखे जाते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने निर्माताओं से पूछा कि यदि वे नाम बदलने को तैयार हैं, तो नया नाम क्या होगा? साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि फिल्म के कंटेंट में किसी समुदाय के प्रति कुछ भी आपत्तिजनक न हो।
दिल्ली हाई कोर्ट से शुरू हुआ मामला;
सुप्रीम कोर्ट पहुँचने से पहले यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में था, जहाँ याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि यह टाइटल हिंदू पुजारियों और एक विशिष्ट समुदाय की छवि को धूमिल करता है।
विवाद का मुख्य कारण;
याचिकाकर्ता के अनुसार, ‘घूसखोर पंडित’ जैसा शीर्षक न केवल एक समुदाय को बदनाम करता है, बल्कि सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी भड़काऊ साबित हो सकता है। इसी के चलते फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी।