मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत मिल गई है। जेल से बाहर आने के बाद वे भारी समर्थकों और शक्ति प्रदर्शन के साथ पटना स्थित अपने विधायक आवास पहुंचे, जहां से अब उनके मोकामा जाने की तैयारी है। कोर्ट ने उन्हें 15-15 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर रिहा किया है। इस मामले में अदालत ने पाया कि पुलिस की कहानी कई जगहों पर स्पष्ट और मजबूत नहीं बन पाई। न तो हत्या का कारण पूरी तरह साबित हो सका और न ही घटनास्थल व पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से कोई ठोस निष्कर्ष निकल पाया। इन्हीं वजहों से कुछ शर्तों के साथ जमानत मंजूर की गई।

कोर्ट के फैसले के मुख्य आधार;
अदालत ने जमानत देते समय चार अहम बिंदुओं पर विचार किया:-
– प्रत्यक्ष सबूत कमजोर पाए गए।
– गवाहों के बयानों में अंतर था।
– घटना की परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं थीं।
– केस डायरी के तथ्य निर्णायक साबित नहीं हुए।
बचाव पक्ष के तर्क;
अनंत सिंह के वकील ने अदालत में कई दलीलें दीं:-
– घटना में उनकी सीधी भूमिका का कोई ठोस प्रमाण नहीं
– गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते
– पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली से मौत की पुष्टि नहीं, बल्कि ठोस वस्तु से चोट का जिक्र
– साजिश के आरोप के समर्थन में कोई डिजिटल या कॉल रिकॉर्ड सबूत नहीं
– लंबे समय से हिरासत और ट्रायल में देरी को देखते हुए जमानत उनका अधिकार बताया गया
अभियोजन पक्ष की आपत्ति;
वहीं पीड़ित पक्ष और अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए कहा:-
– हमला सुनियोजित था और काफिले ने हिंसा की।
– फायरिंग के बाद ही मौत हुई, ऐसा गवाहों ने बताया।
– घायल होने के बाद गाड़ियों से कुचलने का आरोप।
– आरोपी प्रभावशाली हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
– मामला गंभीर हत्या का है, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।