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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जारी महागठबंधन का घोषणापत्र इस बार चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। 2020 के घोषणापत्र की तुलना में इस बार न केवल नाम और नारे में बदलाव किया गया है, बल्कि वादों की संख्या और स्वरूप भी काफी बदले हैं। तेजस्वी यादव ने इस बार का घोषणापत्र ‘तेजस्वी प्रण’ नाम से जारी किया है, जिसमें नारा है “संपूर्ण बिहार, संपूर्ण परिवर्तन।”
2020 में महागठबंधन ने ‘प्रण हमारा, संकल्प बदलाव का’ शीर्षक से 17 वादे किए थे। पांच वर्षों में परिस्थितियाँ बदलने के साथसाथ तेजस्वी का दृष्टिकोण भी व्यापक हुआ है। इस बार घोषणापत्र में युवाओं, महिलाओं, किसानों और छात्रों को केंद्र में रखा गया है, जिससे हर वर्ग को साधने का प्रयास किया गया है।
घोषणापत्र के अनुसार, रोजगार अब भी तेजस्वी यादव का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। 2020 में जहां 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया गया था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर ढाई करोड़ तक पहुंच गई है। तेजस्वी ने घोषणा की है कि सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर कानून बनाकर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी और 20 महीनों के भीतर नौकरी देने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया जाएगा।
महिलाओं के लिए ‘माई, बहिन और बेटी योजना’ की घोषणा की गई है, जिसके तहत प्रत्येक महिला को ₹2,500 मासिक आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही 2,000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी और महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सुविधा देने का वादा किया गया है।
किसानों के लिए इस बार फसल और किसान बीमा योजना लागू करने की बात कही गई है। पिछली बार जहां कृषि ऋण माफी का वादा था, वहीं अब किसानों के सुरक्षा कवच के रूप में बीमा योजनाएं शामिल की गई हैं। छात्रों के लिए भी कई घोषणाएं की गई हैं। गरीब तबके के छात्रों को आठवीं से 12वीं तक टैबलेट देने और 70 किलोमीटर के दायरे में नए विश्वविद्यालय खोलने की बात कही गई है। वहीं, जीविका दीदी (जिन्हें ‘सीएम दीदी’ कहा गया है) को राज्यकर्मी का दर्जा और ₹30,000 मासिक वेतन देने का वादा भी किया गया है।
महागठबंधन के इस घोषणापत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा ₹500 में गैस सिलेंडर और ₹25 लाख तक के स्वास्थ्य बीमा कवरेज जैसी योजनाएँ भी शामिल हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि “यह घोषणापत्र सिर्फ वादों का नहीं, बल्कि बिहार के हर वर्ग के सम्मान और समृद्धि का दस्तावेज है।”