तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर तीखा हमला: “मतदाता सूची पुनर्निरीक्षण अभियान में भ्रम और पारदर्शिता की कमी”

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चल रहे मतदाता सूची पुनर्निरीक्षण अभियान पर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग इस प्रक्रिया में “भ्रमित” है और उसमें “पारदर्शिता की कमी” है।

यादव ने कहा कि यह दूसरी बार है जब वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन स्थिति में कोई स्पष्टता नहीं आई है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इस अभियान में कई बार चुनाव आयोग ने दिशा-निर्देशों में बदलाव किए हैं। कभी योग्यता की स्थिति बदली, कभी दस्तावेजों की प्रकृति बदली और कभी समय सीमा में बदलाव किया।” उन्होंने हैरानी व्यक्त की कि यह किस प्रकार का पुनर्निरीक्षण है जहां हर हफ्ते आदेश बदले जा रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि आयोग स्वयं सुनिश्चित नहीं है कि उसे क्या करना है।

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तेजस्वी यादव ने आगे आरोप लगाया कि इस पूरे अभियान की योजना किसी राजनीतिक दल के साथ साझा की गई प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या कोई सर्वदलीय बैठक हुई है? अभी तक कोई भी सर्वदलीय बैठक नहीं हुई है।” उन्होंने बताया कि राजद ने पहले भी चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था और कल भी अनुरोध किया, लेकिन अभी तक कोई अनुमति नहीं मिली है।

उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए दी गई एक महीने की समय सीमा पर भी सवाल उठाया, खासकर जब चुनाव नवंबर में होने हैं। यादव ने कहा, “केवल एक महीने में एक अभियान को खत्म करना है, हर पांच-छह दिन पर हमने सवाल उठाए हैं, क्लैरिटी नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र में एक गंभीर संवैधानिक मसला है, फिर भी चुनाव आयोग इन बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

आयोग की दलीलों पर सवाल:

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की इस दलील पर भी सवाल उठाए कि 2003 के बाद से शहरीकरण, सूचना के समय, और फर्जी तथा विदेशी नागरिकों के नाम सूची में दर्ज होने जैसी समस्याओं के कारण गहन मतदाता पुनरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आखिर चुनाव आयोग क्या कारण है कि ठीक चुनाव के दो महीने पहले से इतना बड़ा निर्णय लिया है – और पूरा नए सिरे से वोटर लिस्ट जो है आठ करोड़ लोगों का बनाने का काम करना है।”

उन्होंने पूछा कि अगर ये समस्याएं थीं, तो यह प्रक्रिया लोकसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद या एक-दो साल पहले क्यों नहीं शुरू की गई, ताकि इतनी हड़बड़ी और भ्रम की स्थिति न होती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल बिहार ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां यह गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है, जबकि पूरे देश में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

तीन प्रमुख आपत्तियां:

यादव ने अभियान के नियमों पर तीन प्रमुख आपत्तियां उठाईं:

BLO का तीन बार निवास पर जाना: आयोग का कहना है कि BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) तीन बार मतदाता के निवास स्थल पर जाएंगे और यदि मतदाता नहीं मिलेंगे तो उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। तेजस्वी ने कहा कि यह उन लोगों के साथ अन्याय होगा जो रोजगार के लिए लंबी या छोटी अवधि के लिए घर से दूर रहते हैं, जैसे प्रवासी मजदूर या नौकरीपेशा लोग। उन्होंने बताया कि बिहार से तीन करोड़ से अधिक लोग पलायन करते हैं।

भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता: मतदाताओं को गहन पुनरीक्षण के लिए भौतिक रूप से उपस्थित रहना होगा, जो उन लोगों के लिए मुश्किल होगा जो वर्तमान में अपने निवास स्थान पर नहीं हैं।

दस्तावेजों की अनिवार्यता: 2 दिसंबर 2004 के बाद के मतदाताओं को अपने साथ-साथ अपने माता-पिता दोनों का पहचान पत्र देना होगा। तेजस्वी यादव ने इस नियम की आलोचना करते हुए कहा कि आधार कार्ड, राशन कार्ड या मनरेगा कार्ड जैसे आम पहचान पत्र भी स्वीकार्य नहीं होंगे। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त 11 दस्तावेजों की सूची पर भी सवाल उठाया और भारत सरकार तथा बिहार सरकार से पूछा कि इन दस्तावेजों में से कितने प्रतिशत बिहारियों के पास हैं। उन्होंने विशेष रूप से सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मियों के पहचान पत्रों और पेंशन भुगतान आदेशों की उपलब्धता पर डेटा मांगा।

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से इन गंभीर मसलों पर तत्काल ध्यान देने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह एक “एकतरफा और गोपनीय” सफाई अभियान प्रतीत होता है।

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