जनगणना 2027 का आगाज़: आपके घर दस्तक देंगे 33 सवाल, लेकिन क्या आपका डेटा है सुरक्षित? जानिए पूरी सच्चाई!..

Ritu Raj

भारत में प्रस्तावित जनगणना 2027 को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता के साथ-साथ गोपनीयता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। इस बीच भारत सरकार के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।

जनगणना के दौरान घर-घर जाकर परिवार और आवास से जुड़े करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन इन सवालों के जवाब कानूनी रूप से पूरी तरह गोपनीय होंगे। जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 15 के तहत किसी भी व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यहां तक कि सरकार का कोई अन्य विभाग या निजी संस्था भी इस डेटा तक पहुंच नहीं बना सकती। लोगों के मन में अक्सर यह चिंता रहती है कि कहीं उनकी जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त न कर ली जाए, लेकिन नियम साफ हैं कि जनगणना से जुड़ा व्यक्तिगत डेटा RTI के दायरे से बाहर होता है। इतना ही नहीं, इस जानकारी को किसी भी अदालत में सबूत के रूप में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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इस बार की जनगणना तकनीकी रूप से भी काफी उन्नत होगी। डेटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक विशेष वेब पोर्टल के जरिए होगी। साथ ही, डेटा सेंटरों को “क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर” का दर्जा दिया गया है, जिससे उनकी सुरक्षा को राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकता मिलती है। सरकार के अनुसार, एकत्र की गई जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाएगा। इससे देश की जनसंख्या, साक्षरता, और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को समझने में मदद मिलती है। इस डेटा के आधार पर नीतियां बनाई जाती हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की जाती। साथ ही, यह भी साफ किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया का राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) या चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से कोई सीधा संबंध नहीं है। दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं और उनके उद्देश्य भी अलग-अलग हैं। कुल मिलाकर, सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि जनगणना 2027 के दौरान नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और उसका उपयोग केवल देश के विकास से जुड़े कार्यों के लिए ही किया जाएगा।

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