बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक्जिट पोल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने नई अधिसूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान किसी भी तरह का एक्जिट पोल प्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा। यह कदम चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बिहार विधानसभा आम निर्वाचन 2025 के मद्देनज़र भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक्जिट पोल पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। बता दें, आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए के तहत अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि 6 नवंबर की सुबह 7 बजे से लेकर 11 नवंबर की शाम 6:30 बजे तक किसी भी प्रकार का एक्जिट पोल आयोजित करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में कोई भी समाचार चैनल, अख़बार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म या सोशल मीडिया हैंडल मतदाताओं के मतदान के आधार पर किसी भी तरह की भविष्यवाणी या अनुमान साझा नहीं कर सकेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रतिबंध केवल बिहार विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य 7 राज्यों में होने वाले 8 उपचुनावों पर भी समान रूप से लागू रहेगा। साथ ही, आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि मतदान समाप्त होने के बाद 48 घंटे की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के ओपिनियन पोल या सर्वे परिणामों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिखाना भी वर्जित है। निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और मतदाताओं को किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त रखकर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, मीडिया संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों से अपील की है कि वे अधिसूचना में दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करें, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे। आयोग का कहना है कि एक्जिट पोल और ओपिनियन सर्वे पर रोक लगाने का उद्देश्य मतदाताओं को किसी भी तरह के भ्रम या दबाव से दूर रखकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के साथ ही जिन राज्यों में उपचुनाव हो रहे हैं, वहां भी यही नियम लागू रहेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित मीडिया संस्थान या व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।