लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान 9 मार्च 2026 को लोकसभा में होगा, जो बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन है।
इसी बीच, ओम बिरला बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं, जो 17 फरवरी 2026 को ढाका में होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि लोकसभा स्पीकर का पद कितना प्रभावशाली होता है और ओम बिरला के पास वास्तव में कौन-कौन सी शक्तियां हैं? लोकसभा स्पीकर सदन की सभी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि कार्यवाही संवैधानिक तथा संसदीय नियमों के अनुसार ही चले। गरमागरम बहस के दौरान सदन में अनुशासन बनाए रखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। स्पीकर के पास सदस्यों को अनुचित व्यवहार पर निलंबित करने या सदन से बाहर जाने का आदेश देने का पूरा अधिकार है, ताकि माहौल शांत रहे। वे यह भी तय करते हैं कि कौन से मुद्दे या विधेयक पर चर्चा होगी और सदस्यों को बोलने के लिए कितना समय दिया जाएगा।
स्पीकर की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक शक्ति में से एक है किसी विधेयक को मनी बिल (धन विधेयक) के रूप में वर्गीकृत करना या नहीं। संविधान के अनुसार यह फैसला अंतिम होता है और इसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। मनी बिल घोषित होने पर राज्यसभा की भूमिका सीमित हो जाती है,वह केवल सिफारिश कर सकती है, लेकिन लोकसभा उसे अस्वीकार कर सकती है। इससे वित्तीय और कराधान संबंधी मामलों में स्पीकर की शक्ति और बढ़ जाती है। संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत स्पीकर को यह अधिकार है कि वे तय करें कि कोई सांसद पार्टी बदलने या पार्टी व्हिप तोड़ने पर अयोग्य घोषित किया जाए या नहीं। यह फैसला काफी प्रभावशाली होता है, खासकर संकीर्ण बहुमत वाली सरकारों में। सामान्य कार्यवाही में स्पीकर वोट नहीं देते, लेकिन अगर किसी मुद्दे पर सदन में बराबरी के वोट आते हैं (टाई), तो स्पीकर निर्णायक वोट डाल सकते हैं।
विधायी शक्तियों के अलावा स्पीकर के पास प्रशासनिक अधिकार भी व्यापक हैं। सभी संसदीय समितियां स्पीकर की निगरानी में काम करती हैं और वे इन समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति करते हैं। स्पीकर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भी करते हैं और लोकसभा सचिवालय के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं। भारत के आधिकारिक प्रोटोकॉल में लोकसभा स्पीकर छठे स्थान पर आते हैं, जो उनके पद की गरिमा और महत्व को दर्शाता है। संक्षेप में, ओम बिरला के पास ये सभी संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक शक्तियां हैं, जो लोकसभा स्पीकर के पद को भारतीय संसद में सबसे ताकतवर और निष्पक्ष भूमिका बनाती हैं।