क्रिकेट के लिए वैभव सूर्यवंशी ने छोड़ी 10वीं की बोर्ड परीक्षा; पिता बोले- ‘अभी सिर्फ पिच पर रहेगा ध्यान’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के लाल और क्रिकेट जगत के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इस साल अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा (CBSE Class 10th) में शामिल नहीं होंगे। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले वैभव इस बार ‘परीक्षा की पिच’ पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे। स्कूल प्रशासन और उनके परिवार ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि व्यस्त क्रिकेट शेड्यूल और आगामी टूर्नामेंटों की तैयारी के चलते उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है।

एडमिट कार्ड मिलने के बाद भी नहीं देंगे एग्जाम
वैभव सूर्यवंशी समस्तीपुर के मोडेस्टी स्कूल (ताजपुर) के छात्र हैं। स्कूल के डायरेक्टर ए. के. पिंटू ने जानकारी दी कि वैभव का परीक्षा फॉर्म भरा जा चुका था और सीबीएसई ने उनका एडमिट कार्ड (हॉल टिकट) भी जारी कर दिया था। उनका परीक्षा केंद्र शहर के पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल में निर्धारित किया गया था। सोशल मीडिया पर उनका एडमिट कार्ड भी काफी वायरल हुआ था, लेकिन खेल के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्होंने साल बचाने के बजाय खेल को प्राथमिकता दी है।

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पिता ने बताया क्यों लिया यह फैसला
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी ने इस निर्णय पर स्पष्टता देते हुए कहा, “अभी वैभव का पूरा ध्यान पूरी तरह से क्रिकेट पर है। वह फिलहाल कड़ी ट्रेनिंग और कैंप में व्यस्त हैं। 17 फरवरी से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के बीच उनके कई महत्वपूर्ण मैच और अभ्यास सत्र हैं। ऐसे में हमने तय किया है कि वह इस साल परीक्षा नहीं देंगे और अगले साल अपनी बोर्ड की पढ़ाई पूरी करेंगे।”

अंडर-19 वर्ल्ड कप के हीरो और IPL की तैयारी
महज 13-14 साल की उम्र में क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचाने वाले वैभव ने हाल ही में अंडर-19 वर्ल्ड कप में अपनी धुआंधार बल्लेबाजी से भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें आगामी आईपीएल (IPL) सीजन के लिए राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) ने अपनी टीम में शामिल किया है। पूरे बिहार और देश को उम्मीद है कि वैभव आने वाले समय में भारतीय सीनियर टीम का भी चमकता चेहरा बनेंगे।

17 फरवरी से 11 मार्च तक चलने वाली इन परीक्षाओं को छोड़कर वैभव अब अपनी पूरी ताकत नेट प्रैक्टिस और तकनीक सुधारने में लगा रहे हैं। उनके कोच और समर्थकों का मानना है कि एक साल की पढ़ाई खेल के प्रति उनके जुनून के सामने छोटा बलिदान है।

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