सीवान में विजिलेंस का शिकंजा: 15 हजार घूस लेते राजस्व कर्मी रंगे हाथ गिरफ्तार

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। घूसखोरों पर नकेल कसते हुए, विजिलेंस की टीम ने शुक्रवार को सीवान जिले के हसनपुरा प्रखंड में एक बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

विजिलेंस की टीम ने राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा के निजी कार्यालय में छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसके निजी कार्यालय में मौजूद एक निजी कंप्यूटर ऑपरेटर धनंजय को भी हिरासत में लिया गया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। निगरानी की इस कार्रवाई से पूरे अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया है।

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₹65 हजार की रिश्वत की मांग: शिकायतकर्ता का आरोप
निगरानी के डीएसपी श्याम बाबू ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्रवाई हसनपुरवा निवासी श्रेषराज सिंह की लिखित शिकायत पर की गई है। श्रेषराज सिंह ने 10 नवंबर को निगरानी दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई थी कि राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा उनसे परिमार्जन के नाम पर 65 हजार रुपये की मोटी रकम घूस के तौर पर मांग रहे हैं।

शिकायतकर्ता श्रेषराज सिंह का आरोप था कि पैसा न देने पर राजस्व कर्मचारी ने उनके आवेदन को दो बार रद्द कर दिया था। बाद में दिलीप सिन्हा ने 65 हजार रुपये कई किस्तों में देने की बात कही, जिसमें पहली किस्त के रूप में 15 हजार रुपये मांगे गए थे।

सत्यापन के बाद हुई गिरफ्तारी
शिकायतकर्ता श्रेषराज सिंह के आवेदन पर निगरानी विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी। गोपनीय ढंग से किए गए सत्यापन में शिकायतकर्ता की सभी बातें सही साबित हुईं। जिसके बाद 26 नवंबर को राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा के खिलाफ आधिकारिक तौर पर केस दर्ज किया गया।

शुक्रवार को निगरानी की 6 सदस्यीय टीम तय योजना के तहत दिलीप कुमार सिन्हा के प्राइवेट ऑफिस पहुँची। जैसे ही शिकायतकर्ता श्रेषराज सिंह 15 हजार रुपये की घूस की रकम देने पहुँचे और दिलीप सिन्हा ने उसे लिया, विजिलेंस की टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद राजस्व कर्मचारी दिलीप कुमार सिन्हा और उसके निजी ऑपरेटर धनंजय को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। दोनों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना लाया जाएगा, जहाँ उन्हें निगरानी कोर्ट में पेश किया जाएगा।

निगरानी विभाग की लगातार हो रही कार्रवाई के बावजूद सरकारी कर्मचारियों का रिश्वतखोरी से बाज न आना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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