जब महज 7 दिनों के लिए सीएम बने थे नीतीश कुमार: जानें कैसे मिला और क्यों गंवाया मौका

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम सबसे ज्यादा बार शपथ लेने वाले नेताओं में शामिल है, लेकिन उनके राजनीतिक सफर का एक बेहद अहम पड़ाव साल 2000 का है। यह वह समय था जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल केवल सात दिनों का रहा। यह कहानी उनके संघर्ष, राजनीतिक दांव-पेंच और उस दौर के बिहार के सियासी समीकरणों को दर्शाती है।

समता पार्टी का गठन और शुरुआती चुनौतियां

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नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के वर्चस्व वाले जनता दल से अलग होकर 1994 में जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया। उनकी यह असहमति लालू प्रसाद की कार्यशैली और सरकार को लेकर थी। 1995 के विधानसभा चुनाव में समता पार्टी ने लालू प्रसाद के जनता दल के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें केवल 7 सीटें मिलीं और लालू की सरकार फिर से बनी।

साल 2000 के चुनाव और बहुमत का गणित

साल 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में, समता पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन ने कुल 122 सीटें हासिल कीं, जिनमें समता पार्टी की 34, भाजपा की 67 और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) में विलय होने वाली अन्य पार्टियों की 21 सीटें शामिल थीं। हालांकि, 324 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 163 था, जिसे न तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) (जो 124 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी) और न ही NDA गठबंधन छू पाया।

सात दिनों का सीएम कार्यकाल और इस्तीफे की वजह

इस राजनीतिक गतिरोध के बीच, केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार ने बिहार में सरकार बनाने का जोखिम उठाया। उस समय केंद्र में कृषि मंत्री रहे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया। 3 मार्च 2000 को उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सदन में बहुमत साबित करने की थी। NDA गठबंधन के पास निर्दलीय विधायकों को मिलाकर भी बहुमत से 21 विधायक कम थे। जब नीतीश कुमार को यह एहसास हुआ कि वे बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे, तो उन्होंने 10 मार्च 2000 को, यानी शपथ लेने के महज सात दिन बाद, अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफे के बाद का घटनाक्रम

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, RJD ने राबड़ी देवी के नेतृत्व में सरकार बनाई, जो अगले पांच साल तक चली। यह जानना दिलचस्प है कि 2000 के चुनावों में लालू प्रसाद यादव खुद मुख्यमंत्री क्यों नहीं बने। इसका कारण चारा घोटाला था, जिसमें कानूनी पचड़े और गिरफ्तारी की संभावना को देखते हुए उन्होंने 1997 में ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया था।

यह छोटा-सा कार्यकाल नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। हालांकि, इसके बाद के वर्षों में उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई बार मुख्यमंत्री बने।

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