रात होते ही अंधेरे की चादर क्यों ओढ़ लेता है ताजमहल? वजह जान दंग रह जाएंगे आप!..

Ritu Raj

दुनिया के सात अजूबों में से एक, ताजमहल, दिन की रोशनी में जितना चमकता है, रात के अंधेरे में उतना ही रहस्यमयी लगता है। जहाँ भारत के अन्य स्मारकों को रात में लाइटों से सजाया जाता है, वहीं ताज को अंधेरे में रखना एक वैज्ञानिक मजबूरी और कानूनी जिम्मेदारी है। इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

सफेद संगमरमर की दुश्मन;
ताजमहल का निर्माण जिस सफेद संगमरमर से हुआ है, वह रोशनी को बहुत अधिक परावर्तित (Reflect) करता है। यदि रात में ताज पर कृत्रिम लाइटें जलाई जाएं, तो यमुना किनारे पनपने वाले लाखों कीड़े (विशेषकर गोल्डिचिली) इसकी ओर आकर्षित होंगे। ये कीड़े पत्थर पर बैठकर अपना अपशिष्ट (Acidic Waste) छोड़ते हैं, जिससे संगमरमर पर हरे और काले धब्बे पड़ जाते हैं। इससे ताज की प्राकृतिक सफेदी हमेशा के लिए खराब हो सकती है।

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1997 की घटना;
इतिहास में एक बार ताजमहल को रोशनी से नहलाने की कोशिश की गई थी। 1997 में मशहूर पियानो वादक यन्नी (Yanni) के शो के लिए ताज को रोशन किया गया था। अगली सुबह ASI ने देखा कि पूरी इमारत कीड़ों से ढकी हुई थी। इस घटना ने विशेषज्ञों को चेतावनी दी कि कृत्रिम रोशनी ताज की सेहत के लिए ‘जहर’ समान है। तब से रात में लाइट न लगाने का नियम सख्ती से लागू है।

सुरक्षा और सामरिक कारण;
ताजमहल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय धरोहर है जिसकी सुरक्षा सर्वोपरि है। युद्ध की स्थिति में (जैसे 1971 के दौरान) ताज को हवाई हमलों से बचाने के लिए काले कपड़े और झाड़ियों से ढका गया था। रात में तेज रोशनी इसे मीलों दूर से एक आसान निशाना बना सकती है। अंधेरे में रहने के कारण यह प्राकृतिक रूप से आसमान के साथ घुल-मिल जाता है, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल होता है।

प्राकृतिक सौंदर्य और ‘लाइट पॉल्यूशन’;
सुप्रीम कोर्ट और ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) के नियमों के अनुसार, ताज के आसपास प्रदूषण को न्यूनतम रखना अनिवार्य है। ताजमहल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह पूर्णिमा की रात (Full Moon) को दूधिया रोशनी में खुद-ब-खुद चमकता है। कृत्रिम लाइटें इस प्राकृतिक आभा को खत्म कर देती हैं। कृत्रिम रोशनी वहां के स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र और पक्षियों के प्राकृतिक चक्र को भी प्रभावित करती है।

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