इस बार बदलेंगे समीकरण? खास रणनीति के साथ बिहार दौरे पर अमित शाह, 68 सीटों पर टिकी BJP की नजर

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बीजेपी इस बार चुनाव जितने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। सीमांचल से लेकर नालंदा तक, हर उस क्षेत्र के लिए विशेष रणनीति बना रही है जहां पिछले चुनाव में हार मिली थी। केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे हैं। ये दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चुनाव से पहले पार्टी अपनी रणनीति को मजबूत करने और पिछली कमियों को दूर करने पर जोर दे रही है।

अमित शाह दो दिन के बिहार यात्रा पर हैं, क्या ख़ास योजना बना रहे हैं?

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बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन पूरे राज्य में चुनावी माहौल साफ दिखाई देने लगा है। बड़े-बड़े नेताओं की रैलियां और दौरे शुरू हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर बिहार पहुंचे हैं। ये दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चुनाव से पहले पार्टी अपनी रणनीति को मजबूत करने और पिछली कमियों को दूर करने पर जोर दे रही है। 27 सितंबर को शाह समस्तीपुर के सरायरंजन और अररिया के फारबिसगंज जाएंगे। यहां भी वे कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। इन बैठकों का मकसद साफ है- चुनावी तैयारी को धार देना और उन इलाकों पर ध्यान देा जहां पार्टी पिछली बार कमजोर साबित हुई थी।

क्या है चर्चा का मुख्य मुद्दा?

बैठकों में मुख्य रूप से उन सीटों पर मंथन हो रहा है, जहां बीजेपी दूसरी पोजीशन पर रही थी। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के नतीजों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई जगह मजबूत प्रदर्शन करने के बावजूद जीत से दूर रह गई। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 243 विधानसभा सीटों में से लगभग 68 सीटों पर बीजेपी दूसरे स्थान पर रही। सबसे ज्यादा सीटें सीमांचल इलाके में थीं, जिसमें अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले शामिल हैं। यह इलाका लंबे समय से महागठबंधन, खासकर आरजेडी और कांग्रेस का गढ़ रहा है। यहां बीजेपी ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन जीत नहीं हासिल कर सकी।

बीजेपी की कई सीटों पर हार बहुत ही छोटे अंतर से हुई, इसबार ईन सीटों पर क्या तैयारी है?

लगभग 68 सीटों पर बीजेपी दूसरे स्थान पर रही। पार्टी लगभग 5 सीटों पर 500 वोट से भी कम अंतर से हारी। 11 सीटों पर हार का अंतर 1000 वोट से कम रहा। करीब 40 से 45 सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी 5000 वोट से भी कम अंतर से हारी। इन करीबी हारों में नालंदा, गोपालगंज, भोजपुर, आरा, भागलपुर और पूर्णिया जैसे इलाके शामिल थे। कुछ प्रमुख सीटें जैसे हिलसा (नालंदा), बारबिघा (आरा), भोरे (गोपालगंज) और बछवाड़ा (बिहारशरीफ क्षेत्र) में हार का अंतर 1000 वोट से भी नीचे रहा।

शाह की बैठकों में यह तय किया जा रहा है कि एंटी-इनकंबेंसी झेल रहे विधायकों के क्षेत्रों में लोगों को कैसे शांत किया जाए और नए मुद्दों के जरिए माहौल अपने पक्ष में कैसे बनाया जाए। साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों के साथ तालमेल को और मजबूत करने पर भी चर्चा हो रही है। पार्टी चाहती है कि गठबंधन में किसी तरह की खटपट न दिखे और सभी दल मिलकर चुनाव लड़ें।

अमित शाह का ये बिहार दौरा क्यों अहम है?

2020 के चुनाव में बीजेपी ने काफी करीबी मुकाबलों में हार झेली थी। अगर वह इन छोटे-छोटे अंतर वाली सीटों पर जीत दर्ज कर लेती तो नतीजे काफी अलग होते। यही वजह है कि अमित शाह का यह दौरा पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। वह कार्यकर्ताओं को जोश दिलाने के साथ यह भी बता रहे हैं कि अगले चुनाव में जीत उन्हीं सीटों से तय होगी, जहां पिछली बार हार बहुत मामूली अंतर से हुई थी।

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