6 माह,8 बिजनेसमैन की हत्या,5 बार पुलिस की पिटाई,कितनी बेबस है बिहार पुलिस?

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव : पटना में शुक्रवार की देर रात करीब 11 बजे मगध अस्पताल के मालिक और बड़े उद्योगपति गोपाल खेमका की  हत्याकांड ने बिहार में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं . गोपाल खेमका की हत्या कोई पहली घटना नहीं है. वर्ष 2025 में बिहार में बड़े व्यापारियों और व्यवसायियों को टारगेट मर्डर की संख्या में वृद्धि हुई है. बिहार में रंगदारी एक बड़ा मुद्दा रहा है जहां अपराधी बड़े व्यवसायियों से मोटी रकम की उगाही करते हैं. जो कारोबारी इसका विरोध करते हैं उन्हें अक्सर निशाना बनाया जाता है. इसके अलावा कुछ मामलों में व्यक्तिगत रंजिश और संपत्ति विवाद भी हत्याओं का कारण बन रहे हैं.

गोपाल खेमका हत्याकांड: पटना के मगध अस्पताल के मालिक और प्रमुख व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या गांधी मैदान थाना क्षेत्र में पनाश होटल के पास हुई. यह घटना 4 जुलाई की देर रात 11 बजे की है और पुलिस एक घंटे बाद भी घटनास्थल पर नहीं पहुंची.

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।


अंजनी सिंह मर्डर केस: पटना के जमीन कारोबारी अंजनी सिंह की पुनपुन के सोहगीकंडाप पथ पर कंडाप पैक्स गोदाम के पास 22 जून 2025 की रात गोली मारकर हत्या की गई. वह ब्रह्मभोज से लौट रहे थे जब बाइक सवार बदमाशों ने उनकी गर्दन के नीचे गोली मारी.


रजी अहमद उर्फ नन्हू मियां की हत्या: जमीन कारोबारी रजी अहमद की 19 जून 2025 की शाम नालंदा के पनहेस्सा गांव में गोली मारकर हत्या की गई.हालांकि, पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और इस्तेमाल हथियार भी बरामद किए गए.


विनय गुप्ता मर्डर केस: भागलपुर के किराना व्यवसायी विनय गुप्ता की मई 2025 में नवगछिया बाजार, हडिया पट्टी में नकाबपोश अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी.मामले की पुलिस जांच कर रही है, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई.


रमेश चंद्रा हत्याकांड: मुजफ्फरपुर में मार्च 2025 में एक बड़े रियल एस्टेट कारोबारी रमेश चंद्रा की उनके कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या की गई. इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया, लेकिन मास्टरमाइंड अभी तक फरार है.


संजय अग्रवाल हत्याकांड: अप्रैल 2025 को गया में एक नामी ज्वेलर संजय अग्रवाल की दुकान लूटने के बाद हत्या कर दी गई. इस घटना को रंगदारी से जोड़ा गया.


विनोद मेहता मर्डर केस: जनवरी 2025 में भागलपुर के कपड़ा व्यवसायी विनोद मेहता की उनके घर के पास चाकू मारकर हत्या की गई. इस मामले में रंगदारी और व्यक्तिगत रंजिश की आशंका जताई गई.

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य छोटे-मोटे व्यवसायियों की हत्याएं भी दर्ज की गई हैं. साफ है कि गोपाल खेमका की हत्या ने एक बार फिर बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं.विपक्ष के राजनीतिक दलों से लेकर आम लोग भी अब सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं और ‘जंगलराज’ की वापसी करार दे रहे हैं.

गोपाल खेमका की हत्या और 2025 में अन्य व्यवसायियों पर हमले बिहार में बढ़ते अपराध का एक खतरनाक संकेत हैं. यह न केवल कानून व्यवस्था की विफलता को बता रहा है, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति पर भी असर डाल सकता है. इन लगातार हत्याओं ने बिहार के व्यापारी समुदाय में डर का माहौल पैदा कर दिया है. कई व्यवसायी अब खुले तौर पर अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. पटना के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन अब अपनी जान का डर सताने लगा है. सरकार को कुछ करना चाहिए.

अगर व्यापारी सुरक्षित नहीं होंगे तो निवेश और कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है. ऐसे में सरकार और पुलिस को इस दिशा में तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि अपराधियों में डर पैदा हो और व्यापारी समुदाय में विश्वास बहाल हो.

Share This Article