सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के शिवहर जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया सुस्ती को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जिले के पिपराही थाना क्षेत्र के दोस्तियां गांव में एक 18 वर्षीय युवक की बेरहमी से हुई पिटाई और उस पर पुलिस की निष्क्रियता के विरोध में शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने पिपराही-ढाका स्टेट हाईवे संख्या-54 को राजदेवी चौक के पास जाम कर दिया और बीच सड़क पर टायर जलाकर आगजनी की।
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 24 दिसंबर की रात को हुई थी। आरोप है कि दोस्तियां गांव (वार्ड-12) निवासी स्वर्गीय शिवचंद्र साह के पुत्र दीपक कुमार को गांव के ही कुछ दबंग युवकों ने घेर लिया। हमलावरों ने दीपक पर लाठी, डंडों और बेल्टों से ताबड़तोड़ वार किए। पिटाई इतनी वहशीयाना थी कि दीपक के सिर से लेकर पैर तक गंभीर जख्म हो गए। गंभीर हालत में उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसे मुजफ्फरपुर के SKMCH रेफर किया गया। हालांकि, परिवार की माली हालत इतनी खराब थी कि आर्थिक तंगी के कारण मां अपने घायल बेटे को लेकर घर वापस लौट आई।
पिटाई के सदमे में खोया मानसिक संतुलन
शारीरिक चोटों के साथ-साथ इस घटना ने दीपक को मानसिक रूप से भी तोड़ दिया है। परिजनों का कहना है कि गुरुवार से दीपक की स्थिति और बिगड़ गई और उसने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है। जख्मी युवक फिलहाल घर पर ही बेसुध पड़ा है। दीपक की मां सीता देवी ने रोते हुए बताया कि उन्होंने थाने में कन्हैया कुमार, बिगू राय, श्यामबाबू राय और रमेश कुमार के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि हमलावरों ने मारपीट के साथ-साथ दीपक का मोबाइल और नकदी भी छीन ली थी।
पुलिस की सुस्ती पर भड़के ग्रामीण
घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया। शुक्रवार को राजदेवी चौक पर घंटों तक नारेबाजी होती रही, जिससे वाहनों का परिचालन ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रही है। मौके पर पहुंची पुलिस को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। काफी मशक्कत और ‘टाइगर मोबाइल’ टीम द्वारा आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के पुख्ता आश्वासन के बाद ही जाम समाप्त हो सका।
फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे।