पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) की जमानत याचिका पर पटना की अदालत में आज सुनवाई नहीं हो पाई। सुरक्षा कारणों से कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित हुई, इसलिए वे पटना के बेऊर जेल में ही रहेंगे।
पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक मामले (1995 का) में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) में मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया। अस्पताल के अधीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि वे फिट हैं, लेकिन बेऊर जेल ले जाते समय वे एंबुलेंस में लेटे हुए थे। कोर्ट ने उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था, और जमानत पर सुनवाई सोमवार को निर्धारित थी, लेकिन आज पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट भी खाली कराया गया। इसी वजह से जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई।
इस बीच, पप्पू यादव के समर्थन और पटना NEET छात्रा मामले में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। रविवार को पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘पप्पू यादव को रिहा करो’ के नारे लगाए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पोस्टर जला दिए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें पीड़िता की मां और परिजन शामिल हुए। सैकड़ों लोग जुटे और न्याय की मांग की।
पप्पू यादव NEET छात्रा की मौत (कथित बलात्कार और हत्या) के मामले में लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों के ऑडियो क्लिप जारी किए थे, जिनमें इलाज में लापरवाही के आरोप थे। वे संसद के बाहर पोस्टर-बैनर लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं और जंतर-मंतर पर भी जाने वाले थे, लेकिन गिरफ्तारी से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उनके समर्थक और परिवार का आरोप है कि NEET मामले में मुखर होने की वजह से ही उन्हें पुराने केस में फंसाया गया है। उनकी मां शांति प्रिया ने भी कहा कि पुलिस और सरकार उन्हें बेवजह परेशान कर रही है। वहीं, कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। फिलहाल, पप्पू यादव बेऊर जेल में हैं और उनकी जमानत पर अगली सुनवाई की प्रतीक्षा है। यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में तीखी बहस छेड़ रहा है।