सिटी पोस्ट लाइव
बेतिया। बेतिया के नरकटियागंज स्थित सत्यम चाइल्ड हेल्थ केयर में नवजात की मौत के बाद हंगामे ने स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई उजागर कर दी है। बिना रजिस्ट्रेशन संचालित नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और जांच लैब पर प्रशासन द्वारा सख्ती का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश बेअसर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएस) ने पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया था कि अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड और जांच घरों को चिह्नित कर कार्रवाई करें, लेकिन प्रशासन की ढील के कारण ये धंधे तेजी से फल-फूल रहे हैं। अनुमंडल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के आसपास कई अवैध क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
नवजात की मौत पर बवाल, दब गया मामला
सुमन बिहार स्थित सत्यम चाइल्ड हेल्थ केयर में इलाज के दौरान एक नवजात की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हुई। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल से जुड़े दलालों ने परिजनों को मना लिया और मामला दबा दिया।
निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में मनमाने ढंग से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मरीजों को बिचौलियों के माध्यम से इन अवैध अस्पतालों में लाया जाता है और मोटी रकम वसूली जाती है। कई सरकारी डॉक्टर भी निजी क्लीनिक चला रहे हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।
दिखावे की छापेमारी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा छापेमारी का दिखावा किया जाता है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक बेरोकटोक चलते हैं। अनुमंडल या जिला से जांच टीम पहुंचने से पहले ही इन अस्पतालों के शटर गिरा दिए जाते हैं।
शहर के अस्पताल रोड और अन्य इलाकों में बिना लाइसेंस के कई अल्ट्रासाउंड सेंटर और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। कुछ चिकित्सक बीएएमएस की डिग्री के बावजूद खुलेआम ऑपरेशन कर रहे हैं। प्रशासन को इस गोरखधंधे पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।