दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण धमाके में अब जांच एजेंसियों को ANFO (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) के इस्तेमाल के सबूत मिले हैं। यह वही केमिकल है जिसका उपयोग आमतौर पर खाद बनाने में होता है, लेकिन गलत हाथों में पड़ जाए तो यह विनाशकारी विस्फोटक बन जाता है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि धमाका मैन्युअली ट्रिगर किए गए डेटोनेटर से किया गया, जिससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
ANFO क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है:
अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃) एक सफेद, गंधहीन रसायन है जो खाद (fertilizer), केमिकल इंडस्ट्री और आइस‑पैक में काम आता है।
खुद यह आसानी से फटने वाला पदार्थ नहीं है, लेकिन जब इसमें तेल/फ्यूल मिलाते हैं तो यह ANFO बन जाता है,लगभग 90–94% AN + ~6% फ्यूल ऑयल होता है।
AN अपने आप ऑक्सीजन देता है; फ्यूल जलकर तेज प्रतिक्रिया करता है, जिससे बहुत गर्मी और दबाव बनता है।
ANFO को सामान्यतः सीधे झटके से नहीं लगाया जा सकता — विस्फोट के लिए डेटोनेटर की जरूरत होती है (यह तकनीकी बात है, यहाँ बनाने का तरीका नहीं बताया जा रहा)।
इसकी ताकत TNT का लगभग 80–85% मानी जाती है, इसलिए गलत हाथों में ये बहुत खतरनाक और विनाशकारी साबित हो सकता है।
ANFO कितना घातक है और यह कितनी तबाही कर सकता है:
ANFO विस्फोट बेहद विनाशकारी होता है। इसकी गति 14,000 किमी/घंटा तक होती है और बनने वाली शॉक वेव साउंड वेव से पांच गुना तेज होती है, जिससे कान और फेफड़े तुरंत प्रभावित हो सकते हैं। उड़ते शीशे, ईंट और लोहे के टुकड़े आसपास के लोगों को गंभीर चोटें दे सकते हैं। विस्फोट के बाद आग, इमारतों का ध्वंस और नाइट्रोजन ऑक्साइड व अमोनिया जैसी जहरीली गैसें फैल सकती हैं। 1 किलो ANFO ≈ 0.8 किलो TNT के बराबर विस्फोटक क्षमता देता है, जिससे 5–7 मीटर व्यास का गड्ढा बन सकता है और असर का क्षेत्र 30 मीटर तक फैलता है। बड़े पैमाने पर, 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट 1 किलोमीटर तक प्रभाव डाल सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाके में धमाका दर्जनों लोगों की जान ले सकता है और 50–70 मीटर तक सब कुछ तबाह कर सकता है। विस्फोटक की मात्रा और भीड़ के आधार पर तबाही और बढ़ सकती है।
धमाके में कितने किलो ANFO इस्तेमाल किए गए थे?
सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की तहकीकात कर रही हैं और अभी यह तय नहीं हुआ कि विस्फोट ANFO आधारित IED था या कोई अन्य विस्फोटक इस्तेमाल हुआ। घटनास्थल के वायरल वीडियो में कार से उठता नारंगी धुआँ देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमोनियम नाइट्रेट के धमाके में निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें हवा में मिलकर धुएँ को नारंगी रंग दे सकती हैं।
अमोनियम नाइट्रेट के बम का इस्तेमाल पहले कितने आतंकी हमलों में हुआ?
ANFO बम के सबसे विनाशकारी हिस्सों में से एक का इतिहास दर्दनाक है। 1995 में ओक्लाहोमा सिटी पर हुए धमाके में लगभग 1800 किलो AN इस्तेमाल किया गया था, जिससे एक बड़ी इमारत ध्वस्त हो गई और 168 लोगों की जान चली गई। वहीं, साल 2020 में बेरूत में अमोनियम नाइट्रेट के फटने से भी जबरदस्त तबाही हुई थी; उस दुर्घटना में लगभग 3000 किलो के आसपास सामग्री फटने से शहर का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हुआ और सैकड़ों लोग मारे गए।
भारत में अमोनियम नाइट्रेट से जुड़े प्रमुख धमाके:
1985 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट: 20 अक्टूबर को दिल्ली, यूपी और हरियाणा के 7 स्थानों पर बम फटे। AN को पिक्रिक एसिड और ड्राई बैटरी के साथ छोटी ट्रांजिस्टर डिवाइस में रखा गया था। इस धमाके में 5 लोग मारे गए और कई घायल हुए। जिंदा बम भी बरामद हुआ। खालिस्तानी गुटों का इसमें हाथ माना गया।
पुणे सीरियल ब्लास्ट, 2010: 13 फरवरी को जे.जे. हॉस्पिटल, ओशो आश्रम और साबरी सोसाइटी के पास बम फटे। जांच में AN के अवशेष मिले। हमले में 17 लोग मारे गए और 60 से ज्यादा घायल हुए। पीछे इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था।
हैदराबाद ब्लास्ट्स, 2007: मक्का मस्जिद और आसपास के इलाकों में हुए धमाकों में AN के निशान मिले। इस हमले में 16 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। हमले SIMI से जुड़े थे।