‘भाई वीरेंद्र को नहीं पहचानता…?’ आरजेडी विधायक की बढ़ीं मुश्किलें, पंचायत सचिव को धमकाने और जातिसूचक गाली देने के मामले में चलेगा मुकदमा

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले मनेर विधायक और आरजेडी के दिग्गज नेता भाई वीरेंद्र एक कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। एक पंचायत सचिव को फोन पर धमकाने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और जातिसूचक शब्द कहने के मामले में अब उनके खिलाफ एमपी-एमएलए विशेष अदालत में मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सुनवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
यह विवाद जुलाई 2025 का है, जब सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी। आरोप है कि मनेर विधानसभा क्षेत्र के बलुआ में तैनात पंचायत सचिव संदीप कुमार को विधायक भाई वीरेंद्र ने फोन किया था। बातचीत के दौरान विधायक अपना आपा खो बैठे और उन्होंने सचिव के साथ बेहद आपत्तिजनक व्यवहार किया। ऑडियो में विधायक को यह कहते सुना गया, “भाई वीरेंद्र को नहीं पहचानता… टेढ़िया तू है रे?” इसके अलावा उन पर जूता मारने की धमकी देने और जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा।

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पुलिस जांच में दोषी पाए गए विधायक
घटना के बाद पीड़ित पंचायत सचिव संदीप कुमार ने एससी-एसटी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले की जांच एससी-एसटी थाने की पुलिस पदाधिकारी प्रिया गुप्ता ने की। पुलिस जांच में वादी (पंचायत सचिव) द्वारा लगाए गए आरोप सत्य पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत विधायक के खिलाफ 28 नवंबर को चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की गई थी।

अब एमपी-एमएलए कोर्ट में होगी सुनवाई
शुरुआत में यह मामला एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत में था, लेकिन आरोपी के विधायक होने के कारण कोर्ट ने अब इस केस को पटना सिविल कोर्ट स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो भाई वीरेंद्र की विधायकी पर भी संकट आ सकता है।

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