एक नेता, दो सीटें: क्या कहता है चुनाव आयोग का नियम? वोट डालने से पहले जान लें ये जरूरी बात!..

Ritu Raj

भारत के चुनावी समर में अक्सर यह देखने को मिलता है कि दिग्गज नेता एक ही समय में दो अलग-अलग विधानसभा या लोकसभा सीटों से नामांकन दाखिल करते हैं। चुनावी रणनीतियों और कानूनी प्रावधानों के बीच उलझी इस प्रक्रिया को समझना एक जागरूक मतदाता के लिए बेहद जरूरी है।

एक उम्मीदवार, दो सीटें: क्या कहता है कानून?
भारतीय लोकतंत्र ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत पर चलता है, लेकिन उम्मीदवारों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत किसी भी व्यक्ति को एक ही चुनाव में अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति है। इतिहास है कि 1996 से पहले उम्मीदवारों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी; वे जितनी चाहें उतनी सीटों से अपनी किस्मत आजमा सकते थे। चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और बार-बार होने वाले उपचुनावों के खर्च को रोकने के लिए 1996 में कानून में संशोधन कर इसकी सीमा दो तय कर दी गई।

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जीत के बाद की चुनौती: एक सीट छोड़ना अनिवार्य
यदि कोई राजनेता अपनी रणनीति में सफल रहता है और दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज कर लेता है, तो वह दोनों सीटों का विधायक या सांसद नहीं रह सकता।अधिनियम की धारा 70 के अनुसार, प्रत्याशी को 10 दिनों के भीतर चुनाव आयोग को लिखित में सूचित करना होता है कि वह किस सीट का प्रतिनिधित्व करना चाहता है। नेता द्वारा छोड़ी गई सीट खाली हो जाती है, जिस पर चुनाव आयोग को दोबारा उपचुनाव (Bye-election) कराना पड़ता है। इसका सीधा आर्थिक भार देश के सरकारी खजाने और करदाताओं पर पड़ता है।

नामांकन पत्रों का गणित: एक सीट, कई पर्चे
अक्सर मतदाता इस बात को लेकर भ्रमित रहते हैं कि एक ही सीट पर एक नेता कई बार पर्चे क्यों भरता है। इसके पीछे तकनीकी सुरक्षा का कारण है। सबसे पहले, एक उम्मीदवार एक ही निर्वाचन क्षेत्र में अधिकतम 4 नामांकन पत्र (Sets) दाखिल कर सकता है। यदि तकनीकी त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण एक सेट रद्द हो जाए, तो दूसरा सेट उम्मीदवार की उम्मीदवारी को बचा सके। ध्यान रहे कि नामांकन पत्र चाहे 4 हों, प्रत्याशी की गिनती एक ही होती है।

पात्रता और प्रस्तावक के नियम;

विवरणयोग्यता/नियम
न्यूनतम आयु25 वर्ष
पंजीकरणउम्मीदवार का नाम उस राज्य की मतदाता सूची में होना चाहिए।
प्रस्तावक (मान्यता प्राप्त दल)केवल 1 प्रस्तावक की आवश्यकता।
प्रस्तावक (निर्दलीय/अन्य)संबंधित क्षेत्र के कम से कम 10 मतदाताओं के हस्ताक्षर अनिवार्य।
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