दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में बंद पूर्व सांसद अनंत सिंह की जमानत याचिका पर गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। सियासी सरगर्मी के बीच इस सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह के दिन बाहुबली नेता को जेल से बाहर आने का मौका मिल पाएगा।
याचिका में अनंत सिंह ने खुद को राजनीतिक साज़िश का शिकार बताते हुए दावा किया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं, जिनका उद्देश्य उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करना है। अनंत सिंह के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दलों के काफिले आमने-सामने आए थे, जहां केवल तल्ख बहस हुई थी। न कोई पूर्व योजना थी, न साजिश और न ही किसी प्रकार की हिंसा की मंशा। उन्होंने यह भी कहा है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से गोली लगने की बात नहीं कही गई है, बल्कि मौत भारी चोट लगने से हुई बताई गई है। सिंह का दावा है कि गिरफ्तारी के बाद उन्होंने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया और उनके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं किया गया। साथ ही 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक में प्रचार के दौरान राजद नेता व जनसुराज के प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी। इस मामले में आरोप अनंत सिंह पर लगा और अगले ही दिन, 1 नवंबर की रात उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2 नवंबर को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि मोकामा में अनंत सिंह की चुनावी पकड़ लंबे समय से मजबूत रही है। AK-47 मामले में अयोग्यता के बाद उनकी गैरमौजूदगी में उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव जीतकर इस प्रभाव को कायम रखा। 2025 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह को इसी मामले में बरी किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा मैदान में उतर कर अपने राजनीतिक प्रभाव का प्रदर्शन किया और बड़े अंतर से जीत हासिल की।