पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। इस दौरान भावुक मां ने घटना की जो जानकारी दी, वह व्यवस्था और मानवता पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

घटना का घटनाक्रम: मां की जुबानी
पीड़िता की मां ने बिलखते हुए प्रशांत किशोर को बताया कि बेटी से आखिरी बार 5 जनवरी को बात हुई थी। अगले दिन हॉस्टल की वार्डन (नीतू) का फोन आया कि उनकी बेटी बेहोश हो गई है और उसे “ठंड लग गई है”। वहीं, जब परिजन प्रभात मेमोरियल अस्पताल पहुंचे, तो बेटी बोलने की स्थिति में नहीं थी। मां ने आरोप लगाया कि वहां पुलिस मौजूद नहीं थी। मां के अनुसार, डॉक्टर सतीश ने उन्हें बताया था कि बच्ची के साथ “कुछ गलत” हुआ है और वह काफी डरी हुई है। साथ ही मां ने बताया कि जब बेटी को होश आया और उन्होंने उससे बात करने की कोशिश की, तो डॉक्टर ने उन्हें यह कहकर बाहर निकाल दिया कि बातचीत का असर बेटी की तबीयत पर पड़ेगा।

हॉस्टल प्रशासन पर गंभीर आरोप;
पीड़िता के परिवार ने हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका को संदिग्ध बताया है। मां ने प्रशांत किशोर से कहा कि “हॉस्टल वालों ने हमसे कहा कि आप जितना पैसा बोलेंगी हम देंगे।”

प्रशांत किशोर का आश्वासन और जन आक्रोश;
परिजनों की व्यथा सुनने के बाद प्रशांत किशोर ने उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर बड़े पदाधिकारियों से समय लेंगे और बातचीत करेंगे। जरूरत पड़ने पर परिजनों के साथ मिलकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। साथ ही पीड़ित परिवार को हर संभव कानूनी और नैतिक मदद दी जाएगी। गौरतलब है कि प्रशांत किशोर की विदाई के वक्त स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वहां मौजूद भीड़ ने ‘बिहार सरकार मुर्दाबाद’ और ‘नीतीश कुमार होश में आओ’ के नारे लगाए, जो प्रशासन के प्रति जनता के आक्रोश को दर्शाता है।