पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब तक अनसुलझा है, जिससे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। POCSO Act कोर्ट की फटकार के बाद एजेंसी ने जांच अधिकारी को बदलते हुए डीएसपी विभा कुमारी को जिम्मेदारी सौंपी है। इसी क्रम में छात्रा के मामा को सीबीआई कार्यालय बुलाकर करीब एक घंटे में 25 सवाल पूछे गए।

दरअसल, जांच के दौरान पटना स्थित सीबीआई दफ्तर में प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सतीश से भी पूछताछ की गई। हालांकि, 12 फरवरी को केस अपने हाथ में लेने के बावजूद सीबीआई अब तक किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडेय ने अदालत में शिकायत और मुआवजे के लिए आवेदन दाखिल किया है, जिसकी अगली सुनवाई 23 मार्च को तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच निष्पक्ष नहीं है और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है कि मामले को आत्महत्या माना जाए। मामले में स्थानीय स्तर पर भी विरोध देखने को मिला, जब डीएसपी विभा कुमारी अपनी टीम के साथ जहानाबाद में छात्रा के घर पहुंचीं तो परिजनों और ग्रामीणों ने उनका विरोध किया। उनका कहना था कि बार-बार पूछताछ के बावजूद कोई नतीजा सामने नहीं आया और इससे परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।

इसके अलावा जांच में कई गंभीर खामियों की भी बात सामने आई है। आरोप है कि जेल में बंद मनीष कुमार रंजन से रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं की गई, उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड की ठीक से जांच नहीं हुई और घटना के दिन उसकी लोकेशन भी स्पष्ट नहीं की जा सकी। साथ ही, परिजनों के बयान अब तक कोर्ट में दर्ज नहीं कराए गए और हॉस्टल व आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं किए गए हैं। पूरे मामले में जांच की धीमी गति और लगातार बदलते हालात के कारण सीबीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि पीड़ित परिवार अब भी न्याय की उम्मीद में आगामी सुनवाई का इंतजार कर रहा है।