पटना में हड़कंप: विधानसभा और सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, ईमेल में लिखा- ’13 RDX लगा दिए हैं’…

Ritu Raj

पटना में उस समय हड़कंप मच गया जब पटना सिविल कोर्ट और बिहार विधानसभा को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली। यह धमकी एक ईमेल के जरिए भेजी गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कोर्ट परिसर में विस्फोटक लगाए गए हैं और तय समय पर धमाका किया जाएगा। इस सूचना के मिलते ही सुरक्षा एजेंसियाँ तुरंत हरकत में आ गईं और पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।

धमकी की गंभीरता को देखते हुए बम निरोधक दस्ता (बम स्क्वॉड) और डॉग स्क्वॉड की टीमों को मौके पर तैनात किया गया। सुरक्षा कर्मियों ने कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में हर संदिग्ध वस्तु की जांच शुरू कर दी। हालांकि, एहतियात के तौर पर तलाशी अभियान जारी रहने के बावजूद कोर्ट का कामकाज पूरी तरह बंद नहीं किया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। ईमेल में दी गई धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि इससे पहले भी इसी तरह की धमकियाँ मिल चुकी हैं। कुछ समय पहले दिल्ली पुलिस द्वारा एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद यह माना जा रहा था कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग जाएगी, लेकिन इस नई धमकी ने उस धारणा को फिर से चुनौती दे दी है। इससे यह संकेत मिलता है कि धमकी देने वाले नेटवर्क या समूह अभी भी सक्रिय हो सकते हैं।

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इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली। कई वकीलों ने लगातार मिल रही धमकियों और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि अदालत जैसे संवेदनशील स्थान की सुरक्षा में इस तरह की चूक बेहद चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि दोषियों की जल्द से जल्द पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वकीलों का यह भी कहना है कि अगर अदालत परिसर ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो आम लोगों में भय का माहौल बनना स्वाभाविक है। उन्होंने कोर्ट से भी अपेक्षा जताई है कि वह इस मामले का संज्ञान लेकर पुलिस से जवाब तलब करे और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दे। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा को लेकर और क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है।

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