पटना के लोदीपुर स्थित होटल ताज में हाल ही में हुई हलचल ने आसपास के इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया, लेकिन यह असल में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए की गई एक हाई-लेवल मॉकड्रिल थी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस अभ्यास को इतना यथार्थवादी (Realistic) बनाया कि होटल का परिसर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा दिखने लगा।
अभ्यास की शुरुआत दोपहर के समय हुई, जब तीन डमी आतंकी अचानक होटल के मुख्य द्वार पर पहुंचे। उनके पास डमी AK-47 राइफलें और हैंड ग्रेनेड थे, जो दिखने में पूरी तरह असली लग रहे थे। आतंकियों ने अपनी रणनीति के तहत सबसे पहले प्रवेश द्वार पर दो बम धमाके किए। धुएं और शोर के बीच उन्होंने गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर गोलियां चलाईं। सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए आतंकी होटल की लॉबी और कमरों की तरफ भागे। वहां मौजूद ‘गेस्ट्स’ (जो ड्रिल का हिस्सा थे) को आतंकियों ने बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया। यह स्थिति सुरक्षा बलों के रेस्क्यू ऑपरेशन की क्षमता को जांचने के लिए तैयार की गई थी।
सुरक्षा बलों का त्वरित ‘रिस्पॉन्स’;
जैसे ही हमले का अलर्ट जारी हुआ, पटना की सुरक्षा व्यवस्था एक्शन मोड में आ गई। बुद्धा कॉलोनी थाने की पुलिस ने कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंचकर होटल के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी। यातायात को डायवर्ट किया गया और बाहरी लोगों के होटल में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार एटीएस (Anti-Terrorism Squad) को कमान सौंपी गई। एटीएस के कमांडो ने होटल की घेराबंदी कर आतंकियों को सरेंडर कराने या उन्हें ढेर करने की रणनीतिक स्थिति संभाली। होटल परिसर के अंदर फंसे निर्दोष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक ‘सेफ कॉरिडोर’ बनाया गया।
फिल्म मेकिंग और पब्लिक अवेयरनेस;
इस मॉकड्रिल की एक खास विशेषता इसकी प्रोफेशनल फिल्म मेकिंग थी। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई को कैमरों में रिकॉर्ड किया गया है ताकि ड्रिल के बाद अधिकारी वीडियो फुटेज देखकर सुरक्षा खामियों की पहचान कर सकें। आम जनता को यह दिखाया जा सके कि संकट की घड़ी में घबराने के बजाय सुरक्षा बलों का सहयोग कैसे करना है। भविष्य के प्रशिक्षण के लिए इसे एक केस स्टडी के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
सुरक्षा की दृष्टि से महत्व;
यह ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि एक एहतियाती संदेश है कि पटना पुलिस और एटीएस किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए 24/7 तैयार हैं। होटल ताज जैसे संवेदनशील और वीआईपी ठिकानों पर इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से किए जाते हैं ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई कमी न रहे।