1994 बैच के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। हाल ही में NEET छात्रा की मृत्यु से जुड़े मामले में सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावे करने के कारण पटना पुलिस ने उनके आवास पर छापेमारी की। उन पर पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित छह गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
शुरुआती जीवन और मेधावी छात्र;
मूल निवासी: मधुबनी, बिहार। उनके पिता ADM पद पर कार्यरत थे।
शिक्षा: दरभंगा से मैट्रिक (जिला टॉपर) करने के बाद पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई की।
चयन: 1994 में UPSC परीक्षा पास कर IPS बने और बिहार कैडर मिला।
विवादों का सिलसिला और करियर का पतन
अनुशासनहीनता: 1997 में देवघर के SP के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। इसके बाद लखीसराय, किशनगंज और अरवल में भी तैनात रहे। हालांकि, 2007 में जमुई (BMP-11) के कमांडेंट रहते हुए उन पर अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप लगे और विभागीय कार्यवाही शुरू हुई।
यौन शोषण के आरोप: 2006 में एक महिला ने उन पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया। बाद में एक अन्य IPS की बेटी ने भी उन पर गंभीर आरोप जड़े।
राजनीतिक टकराव: वे लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीखी और अभद्र बयानबाजी के कारण चर्चा में रहे।
जबरन रिटायरमेंट और वर्तमान स्थिति;
लंबे समय तक निलंबन और कानूनी लड़ाई के बाद, बिहार सरकार ने उनके आचरण को देखते हुए केंद्र से उन्हें सेवामुक्त करने की सिफारिश की। केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद उन्हें ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ (जबरन रिटायर) दे दी गई। उस समय वे SP रैंक पर थे, जबकि उनके बैच के साथी IG बन चुके थे। बता दें कि वर्दी उतरने के बाद उन्होंने ‘क्रांतिकारी न्याय पार्टी’ बनाई। वर्तमान में वे सोशल मीडिया (फेसबुक और यूट्यूब) के माध्यम से सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले जारी रखे हुए हैं।