पटना के चर्चित नीट छात्रा रेप और मौत मामले में आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर गुरुवार को स्थानीय अदालत में गरमागरम बहस हुई। लगभग एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने न केवल जमानत देने से इनकार कर दिया, बल्कि जांच की सुस्त रफ्तार पर पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी;
सुनवाई के दौरान कोर्ट जांच अधिकारियों की लापरवाही पर बेहद सख्त नजर आया। मामले की प्रगति से असंतुष्ट होकर जज ने यहाँ तक कह दिया कि लापरवाही के लिए क्यों न अधिकारियों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया जाए? अधिकारियों की उपस्थिति: सुनवाई के दौरान सचिवालय SDPO-1 अन्नू कुमारी और CBI की टीम कोर्ट में मौजूद थी।

आरोपी मनीष रंजन की प्रोफाइल और गिरफ्तारी का घटनाक्रम;
मनीष रंजन पिछले 43 दिनों से पटना की बेऊर जेल में बंद है। वह उस इमारत का मालिक है जिसमें ‘शम्भू गर्ल्स हॉस्टल’ संचालित होता था।
| विवरण | तथ्य |
| गिरफ्तारी की तारीख | 14 जनवरी (घटना के 3 दिन बाद) |
| मुख्य आरोप | साक्ष्यों से छेड़छाड़ और घटना में संलिप्तता |
| वर्तमान स्थिति | न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) |
जांच में खुले नए राज;
पुलिस और जांच एजेंसियों की पड़ताल में मनीष रंजन के ‘वर्चस्व’ और संदिग्ध दस्तावेजों की बात भी सामने आई है। वहीं, मनीष के नाम पर दो अलग-अलग EPIC नंबर से वोटर आईडी कार्ड मिले हैं (एक जहानाबाद के मखदुमपुर और दूसरा पटना के कुम्हरार से)। दरअसल, वह अपने पैतृक गांव से मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था, जिसके कारण इलाके में उसका काफी प्रभाव था। आरोप है कि इसी रसूख के चलते छात्रा की मौत के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की और 3 दिन बाद केवल ‘साक्ष्य मिटाने’ की आशंका पर उसे गिरफ्तार किया गया।