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नीतीश के सुशासन पर नीति आयोग की लगी मुहर.

2.25 करोड़ लोग BPL से ऊपर उठे, गरीबी उन्मूलन में पड़ोसियों से बहुत आगे निकला बिहार.

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सिटी पोस्ट लाइव : एकबार फिर से नीतीश कुमार के सुशासन पर मुहर लगी है.नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 और 2019-21 के बीच बिहार के 2.25 करोड़ लोग गरीबी की सीमा से बाहर आए हैं. पूरे देश में यह संख्या 13.51 प्रतिशत रही. राज्य के लिए यह उल्लेखनीय उपलब्धि है.पड़ोसी राज्य इस उपलब्धि में बिहार से काफी पीछे छूट गए हैं. शुक्रवार को आंकड़ों और ब्योरे के साथ योजना व विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुणीश चावला और  मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने ये जानकारी मीडिया को दी.

 

2015-16 में बिहार में बहुआयामी गरीबी 51.89 प्रतिशत थी. वह घटकर 2019-21 तक 33.76 प्रतिशत हो गई. इस तरह उन पांच-छह वर्षों के दौरान बिहार में 18.13 प्रतिशत गरीबी कम हुई है. अरुणीश चावला ने कहा कि राज्य सरकार के न्याय के साथ विकास की नीति के बदौलत ये चमत्कार हुआ है.सात निश्चय, कृषि रोडमैप, शिक्षा में नवाचार, स्वास्थ्य के गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम से बिहार समानता आधारित सतत विकास के पथ पर अग्रसर है. इसी कारण वर्ष 2014-15 के 39341 की तुलना में राज्य में प्रति व्यक्ति घरेलू उत्पाद बढ़कर 2021-22 में 54383 रुपये हो गया है.

 

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2015-16 में 56 प्रतिशत गरीबी थी. 2019-21 में घटकर यह 36.95 प्रतिशत हो गई. इस तरह ग्रामीण गरीबी में 19.05 प्रतिशत की कमी आई है. राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 13.31 प्रतिशत है. बिहार के बाद गरीबी में गिरावट दर्ज कराने वाले मध्य प्रदेश (15.94) और उत्तर प्रदेश (14.75) क्रमश: दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं.बिहार से अलग होकर बने झारखंड की गरीबी में 13.29 प्रतिशत की कमी आई है. बिहार का एक अन्य पड़ोसी बंगाल है. उसने गरीबी में 9.41 की कमी दर्ज कराई है. बिजली, रसोई के स्वच्छ ईंधन, बैंक खाता आदिक सूचकांकों पर बिहार की उपलब्धि अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है.

 

राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, महिला विकास, आधारभूत संरचना, पशु संसाधन व आय के साधनों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है. संस्थागत प्रसव से शिशु-मातृ मृत्यु दर में कमी आई है तो अन्न-दूध और मांस-मछली की पर्याप्त उपलब्धता से अधिसंख्य लोगों को पोषणयुक्त भोजन मिलने लगा है.स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों में वृद्धि के साथ ही स्कूलों की संख्या बढ़कर 2021 में 81125 हो गई. बैंकों में जमा खातों की संख्या प्रति हजार जनसंख्या पर बढ़कर 14.76 हो गई है.

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