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हिन्दू-मुस्लिम एकता पर RSS का जोर.

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सिटी पोस्ट लाइव :कट्टरता के लिए जाने जानेवाले  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख  मोहन भागवत ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर देना शुरू कर दिया है.विजयादशमी के अवसर पर नागपुर की रैली में भागवत ने अपने भाषण में संघ के मुस्लिमों के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश का भी जिक्र करते हुए बड़ा संदेश देने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि आखिर एक ही देश में रहने वाले इतने पराए कैसे हो गए? संघ प्रमुख का इशारा मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात को लेकर स्वयंसेवकों की तरफ से उठ रहे सवालों की तरफ था. भागवत ने कहा कि अविवेक और असंतुलन नहीं होना चाहिए. अपना दिमाग ठंडा रखकर सबको अपना मानकर चलना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चुनावों में हमें सतर्क रहना है और किसी के बहकावे में आकर मतदान नहीं करना है. बेहतर कौन है, उसे ही वोट देना है.

 

संघ प्रमुख ने कहा कि यह मानिसकता सही नहीं है कि उनकी वजह से हमें नहीं मिल रहा है या उनकी वजह से हम पर अन्याय हो रहा है. उन्होंने कहा कि विक्टिम हुड की मानसिकता से काम नहीं चलेगा. कोई विक्टिम नहीं है, उन्होंने कहा कि ‘वे कहते हैं मुझे किसी बस्ती में घर नहीं मिलता, इसलिए अपनी बस्ती में ही रहना होता है. एक ही देश में रहने वाले लोग इतने पराए हो गए? माना जा रहा है कि इस बयान के जरिए भागवत ने पीएम मोदी के मुसलमानों के बीच पहुंच बढ़ाने के कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी है.

भागवत ने कट्टरपंथ पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे उन्माद बढ़ता है.उन्होंने कहा कि कि भावना भड़काकर लोगों के वोट लेना ठीक नहीं है. देश में मजबूत सरकार के होते हुए भी यह हिंसा किनके बलबूते इतने दिन बेरोकटोक चलती रही है? पिछले 9 वर्षों से चल रही शांति की स्थिति को बरकरार रखना चाहने वाली राज्य सरकार होकर भी यह हिंसा क्यों भड़की और चलती रही? आज की स्थिति में जब संघर्षरत दोनों पक्षों के लोग शांति चाह रहे हैं, उस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठता हुआ दिखते ही कोई हादसा करवा कर, फिर से विद्वेष और हिंसा भड़काने वाली ताकतें कौन सी हैं?’

भावगत ने कहा कि हमारे संविधान की मूल प्रति के एक पृष्ठ पर जिनका चित्र अंकित है, ऐसे धर्म के मूर्तिमान प्रतीक श्रीराम के बालक रूप का मंदिर अयोध्या जी में बन रहा है. अगले साल 22 जनवरी को मंदिर के गर्भगृह में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी. व्यवस्थागत कठिनाइयों के तथा सुरक्षाओं की सावधानियों के चलते उस पावन अवसर पर अयोध्या में बहुत बड़ी संख्या में लोग नहीं रह पाएंगे. श्रीराम अपने देश के आचरण की मर्यादा के प्रतीक हैं, कर्तव्य पालन के प्रतीक हैं, स्नेह और करुणा के प्रतीक हैं. अपने-अपने स्थान पर ही ऐसा वातावरण बने. राम मंदिर में श्रीरामलला के प्रवेश से प्रत्येक ह्रदय में अपने मन के राम को जागृत करते हुए मन की अयोध्या सजे और सर्वत्र स्नेह, पुरुषार्थ तथा सद्भावना का वातावरण उत्पन्न हो ऐसे, अनेक स्थानों पर परन्तु छोटे छोटे आयोजन करने चाहिए.

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