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अपनी रिहाई का विरोध करनेवालों को आनंद मोहन ने दिया जबाब.

दलितों की लड़ाई हमने लड़ी, सम्वंत्वाद को हमने दफनाया और मुझे बताया जा रहा है दलित विरोधी.

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सिटी पोस्ट लाइव : आनंद मोहन की जेल से परिहार पर रिहाई का विरोध होने लगा है.SC/ST के अध्यक्ष ने आनंद मोहन की परिहार पर रिहाई को लेकर कानून में किये गए बदलाव का विरोध किया है.उन्होंने कहा है कि आनंद मोहन जैसे बाहुबली अपराधी की रिहाई से पिछड़े-अति-पिछड़े समाज के लोग असुरक्षित मह्सुश करेगें.उधर मायावती ने भी आनद मोहन की रिहाई का विरोध किया है.मायावती ने कहा कि दलित IAS अधिकारी, गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया के हत्या के आरोपी की रिहाई दुखद है.

अपनी रिहाई का विरोध किये जाने पर आनंद मोहन ने सिटी पोस्ट लाइव से ख़ास बातचीत में कहा कि आज जो लोग उन्हें दलित विरोधी बता रहे हैं, उन्हें ये पता नहीं है कि आनंद मोहन जीपी आन्दोलन की पैदाईश है.सबसे पहले मैंने ठेला यूनियन, टमटम यूनियन और मछुँवारा यूनियन बनाकर दलितों-पिछड़ों की लड़ाई लड़ी.उनके दादा और पिता ने छुआछुत के खिलाफ संघर्ष किया.मेस्टर के हाथ से जल पीकर उसे चनामृत बताया तो समाज ने उनका बहिष्कार कर दिया.गावं के बाहर उन्हें झोपड़ी बनाकर रहना पड़ा.

आनंद मोहन ने SC/ST कमीशन और मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि मेरे द्वारा किसी दलित को प्रताड़ित किये जाने का कोई एक मामला बता दे.आजतक समाजवाद की लड़ाई लड़ता रहा हूँ और आगे भी लड़ता रहूँगा.मैं वर्ग संघर्ष -जाति-संघर्ष में विश्वास नहीं करता.मैंने हमेशा दलितों और कमजोर लोगों की लड़ाई लड़ी है.उन्होंने मायावती पर तंज कसते हुए कहा कि आज जो तथाकथित दलित नेता हैं जिस स्तर का जीवन जी रहे हैं वैसा ही जीवन सभी दलितों का हो जाए तो देश का कायाकल्प हो जाएगा.उनकी लड़ाई हमने लड़ी है और वो मेवा खा रहे हैं.उन्होंने कहा कि जिस सामंतवाद को हमने दफनाया उसके ऊपर बैठकर कुछ लोग लड़ने सामंतवाद से लड़ने के लाइट ताल थोक रहे हैं.

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