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BJP के पसमांदा मुस्लिम-प्रेम से बढ़ेगी महागठबंधन की चुनौती.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पसमांदा मुस्लिम समाज को अपनी पार्टी से जोड़कर बिहार की सियासत बदल दी थी.अब पीएम मोदी की नजर भी इसी वोट बैंक पर है. बिहार में पसमांदा मुस्लिम की राजनीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आवाज देकर देश की सियासत गरमा दी है. जिस तरह से हिंदुओं में पिछड़े-दलित की जनसंख्या है, उसी अनुपात में बिहार में पसमांदा मुस्लिम मतों का 80 फीसदी वोटों का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही नहीं बल्कि संघ ने भी अपना हाथ इन पसमांदा मुस्लिम की तरफ बढ़ाया है.

बिहार में पसमांदा मुस्लिम  को साधने की बीजेपी की इस रणनीति से विपक्ष की चुनौती बढ़ सकती है. पसमांदा मुसलमानों तक पहुंचने की बीजेपी की कोशिश को महागठबंधन भी गंभीरता से ले रहा है. दरअसल, पसमांदा मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय का एक पिछड़ा वर्ग है जो आजादी के कई दशकों बाद भी उपेक्षित रहा है.बीजेपी  विशेष कर हिंदी पट्टी मसलन बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इन्हे सुविधाएं उपलब्ध कर बीजेपी  से इनकी दूरी कम करने की कोशिश कर महागठबंधन को चुनौती दे डाली है.

पसमांदा मुस्लिम से करीब जाने की जो थ्योरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दी, उस पर अमल कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सफलता का झंडा बुलंद किया. जानकारी के अनुसार, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निचले स्तर से पसमांदा मुस्लिम की भागीदारी प्रारंभ की. वार्ड, पंचायत,नगर परिषद में पसमांदा मुस्लिमों की भागीदारी सुनिश्चित की. परिणाम भी चौकाने वाला था कि यूपी के जिलों में 10 से 20 प्रतिशत सीटों पर पसमांदा मुसलमानों ने भाजपा के लिया जीत का जश्न मनाया.

बीजेपी एमएलसी और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने 25 नवंबर को पटना में पसमांदा मुद्दे पर एक परिचर्चा का आयोजन किया था, जिसमें आरएसएस नेता राम माधव और गुलाम गौस, साबिर अली और अख्तरी बेगम समेत कई मुस्लिम नेताओं ने हिस्सा लिया था. बीजेपी ये जानती है कि  पसमांदा मुस्लिम के नफ़रत को प्रेम में बदलकर महागठबंधन की धार को  कुंद किया जा सकता है.प्रदेश भाजपा ने सूफी संगीत के जरिए भी पसमांदा मुस्लिम से करीब होने की कोशिश लगातार कर भी रही है. उनकी भागीदारी की पंचायत, ब्लॉक और जिलों के स्तर के संघटन में जगह दी जा रही है.

नीतीश कुमार से अलग होने के बाद महागठबंधन के वोटों का कागजी आंकड़ा एनडीए के आंकड़े से काफी आगे दिखता है. ऐसे में भाजपा हम और लोजपा या वीआईपी के जरिए जीत का तिलिस्म नहीं गढ़ सकती है. ऐसे में पसमांदा मुस्लिमों का मत हासिल कर महागठबंधन को संपूर्ण रूप से चुनौती देनी  होगी.भाजपा जानती है मुस्लिम मतों का सॉफ्ट कॉर्नर बन कर सीमांचल का चार लोकसभा सीट को प्रभावित किया जा सकता है. मसलन किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, कटिहार में पसमांदा का 10 प्रतिशत मत भाजपा का चुनावी रंगत बदल सकती है. चर्चा तो है भाजपा मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर जीत के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों की भागीदारी भी बढ़ाएगी. ऐसा इसलिए भी कि सीमांचल के अलावा मधुबनी, दरभंगा, सीवान, सीतामढ़ी, गोपालगंज, गया, भागलपुर जैसे लोकसभा सीटों पर अपना दावा मजबूत किया जाए.

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