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नीतीश बात नहीं मानेंगे तो भुगतना पड़ेगा: दीपांकर .

मांझी के बाद माले ने दिखाए तेवर, दीपांकर बोले- विलय का दबाव छोटी पार्टी को नहीं देना चाहिए.

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सिटी पोस्ट लाइव : 23 जून को पटना में विपक्षी एकता की होनेवाली बैठक के पहले जीतन राम मांझी ने महागठबंधन को छोड़ देने का फैसला लेकर नीतीश कुमार को तगड़ा झटका दिया है. हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन के  मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद  बिहार की राजनीति गरमा गई है. महागठबंधन के सहयोगी दल सीपीआई एमएल के सुप्रीमो दीपांकर भट्टाचार्य ने छोटे दलों पर बड़े दलों द्वारा विलय के लिए दबाव बनाए जाने को गालात करार दिया है.गौरतलब है कि मांझी ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार ने उनके ऊपर हम पार्टी के विलय को लेकर दबाव बनाया था.दीपंकर ने कहा कि जहां तक विलय का सवाल है तो छोटी पार्टियों को विलय के लिए कोई दबाव नहीं बनाना चाहिए. यह दबाव तो बीजेपी लोकतंत्र को खत्म करने के लिए बना रही है. बीजेपी कहती है देश में सिर्फ एक पार्टी हो. जेपी नड्डा पटना आकर जदयू को धमकी देकर गए थे. विपक्ष में छोटी पार्टी और बड़ी पार्टी जैसा कोई सवाल नहीं होना चाहिए.

दीपांकर ने कहा कि मांझी को अपना अस्तित्व बचाए रखते हुए महागठबंधन के साथ बने रहना चाहिए.उन्होंने कहा कि मांझी का ये कहना गलत है कि महागठबंधन में रहना संभव नहीं था.विलय के लिए दबाव था तो ये बात महागठबंधन के सामने आनी चाहिए थी.महागठबंधन में ये बात आती तो महागठबंधन के नेता उनके साथ खड़े रहते.दीपांकर ने माना कि महागठबंधन में कॉर्डिनेशन कमेटी नहीं रहने की वजह से गड़बड़ हो रहा है. हम मांग करते रहे हैं, लेकिन कमेटी नहीं बनी.मेरी पार्टी  महागठबंधन छोड़ कर नहीं जा रही है.लेकिन ये  सवाल आज भी है  कि महागठबंधन के संचालन कैसे व्यवस्थित तरीके से हो.

शिक्षकों की बात नहीं सुने जाने को लेकर दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि बात नहीं मानी जा रही है.  सही बात नहीं मानेंगे तो सीएम नीतीश कुमार को भुगतना पड़ेगा. हम तो शिक्षकों और गरीबों का मुद्दा उठाते रहेंगे.हमने इसकी पहल माले के राष्ट्रीय अधिवेशन में किया था. अधिवेशन में एक सत्र विपक्षी एकता को लेकर था. इस अधिवेशन में सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद शामिल हुए थे. वहीं से एक सिलसिला शुरू हुआ. मुझे लगता है कि 23 जून को होने वाली यह पहली बैठक होगी, जिसमें आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सभी लेफ्ट पार्टियां, राजद, सपा, जेएमएम, डीएमके, शिवसेना, एनसीपी जैसी पार्टियों के नेता एक साथ बैठेंगे. इससे मोदी सरकार घबराई हुई है.

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