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JDU सांसद पुत्र को 1600 करोड़ का ठेका देने को लेकर बवाल..

रविशंकर प्रसाद ने कहा नियम ताक पर रखकर दिया गया ठेका, होनी चाहिए मामले की निष्पक्ष जांच.

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सिटी पोस्ट लाइव : पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब सांसद रविशंकर प्रसाद ने राज्य सरकार पर आपात एंबुलेंस के लिए 1600 करोड़ रुपये के ठेके में नियमों को ताक पर रख जहानाबाद के JDU  चंद्रेश्वर चंद्रवंशी के पुत्र को  लाभ पहुंचाने का  आरोप लगाया है.उन्होंने कहा कि  राज्य सरकार ने पर्याप्त संसाधन व गुणवत्ता बगैर सुनिश्चित किए हुए JDU  सांसद के बेटे की कंपनी पशुपति नाथ डिस्टीब्यूटर्स को टेंडर जारी कर दिया और गुणवत्ता व संसाधन उपलब्ध कंपनियों को टेंडर से बाहर कर दिया गया.उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा इस मामले की ईमानदार से जांच की मांग करती है.

रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को पटना में प्रेस से बात की और कहा कि राज्य की गर्भवती महिला, गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति, बच्चे आदि के लिए आपात एंबुलेंस की व्यवस्था राज्य सरकार करती है.गुणवत्ता व संसाधन उपलब्ध कंपनियों को टेंडर से बाहर किया गया. भाजपा राज्य की गर्भवर्ती महिला और बच्चों के जीवन से किसी को खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगी.रविशंकर प्रसाद ने गुणवत्ता की जांच सक्षम प्राधिकारी से कराने की मांग की और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक पशुपति नाथ डिस्ट्रीब्यूटर्स से सेवा न लेने की मांग की .रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गर्भवती महिला को एक्सपायर दवा भी देने की बात सामने आ रही है. यह गरीब व लाचार लोगों के साथ घोर अन्याय है. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर राजद भी मुखर था. जदयू के साथ सत्ता में आने के बाद राजद आपात एंबुलेंस का मुद्दा भूल गया है.

JDU के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मामला न्यायालय में है इसलिए इस मुद्दे पर वह विशेष टिप्पणी नहीं करेंगे.वैसे तथ्य यह है कि जदयू सांसद के पुत्र को यह काम निविदा के माध्यम से मिला था. निविदा में चार लोग थे और सबसे कम दर कोट करने पर यह काम आवंटित किया गया था. वैसे भी चंद्रेश्वर चंद्रवंशी के पुत्र विगत दो दशक से कारोबार करते हैं. जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि वस्तुस्थिति यह है कि एंबुलेंस का काम करने वाले जिन लोगों ने निविदा की थी, उनमें एक ने इस काम को रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी. सुप्रीम कोर्ट से मामला हाई कोर्ट भेजा गया था.हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया था कि लोगों को परेशानी नहीं हो इसलिए जब तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं होता है तब तक वह कंपनी अपने काम को जारी रखे, जिसे निविदा के आधार पर काम मिला है.

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