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कन्हैया कुमार से तेजस्वी यादव ने क्यों बना रखी है दूर, इनसाइड स्टोरी.

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सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार  बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव (Kanhaiya Kumar and Tejashwi Yadav) को तनिक भी नहीं सुहाते. आजतक  तेजस्वी यादव ने कभी कन्हैया कुमार के साथ मंच साझा नहीं किया है. बुधवार को पटना के बापू सभागार में बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे क्योंकि वहां kanhaiya कुमार थे. इस कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर उद्घाटनकर्ता के रूप में तेजस्वी यादव को करना था, लेकिन एन मौके पर तेजस्वी इस कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए.

तेजस्वी यादव के कार्यक्रम में नहीं आने की खबर फैलते ही मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह गुफ्तगू होने लगी कि कन्हैया कुमार के आने के कारण तेजस्वी यादव ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली तेजस्वी के कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने के सवाल पर जब मीडियाकर्मियों ने मौके पर मौजूद RJD कोटे के मंत्री इसरायल मंसूरी से तेजस्वी यादव के इस कार्यक्रम में नहीं आने की वजह जाननी चाही तो इसरायल मंसूरी सवाल को टालते नजर आए. वहीं कन्हैया ने भी यह कह कर चुप्पी साध ली कि कार्यक्रम संचालन होने दीजिए.

क्या तेजस्वी यादव आपके साथ मंच साझा नहीं करना चाहते हैं? इस सवाल पर कन्हैया कुमार ने केवल इतना कहा कि मंच पर अध्यक्ष जी कुछ कह रहे हैं उनकी बात सुनिए. चलिए हमको जनता को देखने दीजिए. मौके पर मौजूद मंत्री अशोक चौधरी भी इस सवाल को टालते हूए यह कहा कि सरकार कुम्हार जाति के लोगों की भावनाओ का ध्यान रखेगी. बताते चलें की तेजस्वी के नहीं आने के कारण मंत्री अशोक चौधरी और मंत्री इसरायल मंसूरी के साथ कन्हैया ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की.

2019 में कन्हैया कुमार ने बेगूसराय से भाजपा के गिरिराज सिंह के खिलाफ वामपंथी उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा था. वामपंथी नेताओं ने तब आरजेडी से अनुरोध किया था कि वह सीट से अपना उम्मीदवार न उतारे. लेकिन, आरजेडी द्वारा वहां से उम्मीदवार खड़ा किए जाने के बाद कन्हैया कुमार चुनाव हार गए. ऐसा इसलिए हुआ कि महागठबंधन के वोट कन्हैया कुमार और आरजेडी प्रत्याशी के बीच बंट गए. सियासत के जानकार बताते हैं कि लालू प्रसाद यादव के परिवार का मानना है कि अगर कन्हैया कुमार बिहार की राजनीति में खुद को स्थापित करते हैं तो तेजस्वी यादव के लिए मुश्किल पेश आ सकती है. खासकर मुस्लिमों में कन्हैया कुमार काफी लोकप्रिय माने जाते हैं और तेजस्वी की पार्टी राजद से मुस्लिम वोट खिसक सकते हैं. हकीकत भी यही है कि मुस्लिमों के आधार वोट पर भी राजद बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफल है. ऐसे में अगर कन्हैया कुमार के कंधे के सहारे कांग्रेस में थोड़ी भी जान आ गई तो राजद के लिए खतरा हो सकता है.

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