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क्या मिथक तोड़ पायेगें सांसद डॉ आलोक कुमार सुमन?

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गोपालगंज. जेडीयू सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार सुमन को गोपालगंज से लगातार दुसरीबार चुनाव लड़ने का मौका मिल गया है.लेकिन सबसे बड़ा सवाल-क्या डॉक्टर आलोक कुमार सुमन चुनाव जीत पायेगें. वर्ष 1980 के बाद यहां दुबारा कोई सांसद नहीं बना. 1980 के लोस चुनाव के बाद हुए चुनावों में यहां के मतदाताओं ने हर बार नए चेहरे को संसद में भेजा है, लेकिन किसी को लगातार दो बार चुनाव जीतने का मौका नहीं दिया.गोपालगंज संसदीय सीट के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती है. इनमें गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे, हथुआ, बरौली और बैकुंठपुर विधानसभा शामिल है. उत्तर प्रदेश के  देवरिया और कुशीनगर जिला से सटा गोपालगंज गंडक नदी के किनारे बसा है.

डॉ आलोक कुमार सुमन ने अपनी सियासी सफर की शुरुआत  2014 से की है.सीएम नीतीश कुमार ने डॉ आलोक कुमार सुमन को 2019 में जेडीयू के टिकट पर चुनावी मैदान में उतारा. इस चुनाव में उन्होंने आरजेडी प्रत्याशी सुरेंद्र राम उर्फ महान को 2,86,424 मतों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए.  17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 97 फीसदी है. संसदीय कार्यवाही के दौरान जनहित से जुड़े 264 प्रश्न पूछ चुके हैं. 15 प्राइवेट बिल पेश कर चुके हैं. और 100 डिबेट में हिस्सा ले चुके हैं. डॉ आलोक कुमार सुमन का परिवार मेडिकल लाइन में हैं. उनके छोटे भाई स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल अफसर हैं और दो बेटे दिल्ली के राम मनोहर लोहिया में सेवा दे रहें हैं.

गोपालगंज संसदीय क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था. 1957 में पार्टी के डॉ. सैयद महमूद यहां से सांसद चुने गए थे. उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सिया बिहारी शरण को पराजित किया था. 1962 से 1977 तक कांग्रेस के द्वारिका नाथ तिवारी ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 1980 में नगीना राय कांग्रेस के ही टिकट पर इस लोस क्षेत्र से चुने गए. कांग्रेस के गढ़ होने के मिथक को 1984 में निर्दलीय काली प्रसाद पांडेय ने नगीना राय को हरा कर तोड़ा था. जेल में रहते हुए बाहुबली काली प्रसाद पांडेय ने निर्दलीय जीत हासिल की थी. आज काली प्रसाद पांडेय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं.

1989 में राजमंगल मिश्र ने काली प्रसाद पांडेय को पटखनी दी. दो साल का कार्यकाल था. 1991 में चंद्रशेखर सिंह की पार्टी के उम्मीदवार राजमंगल मिश्र को पटकनी देकर जनता दल के अब्दुल गफूर सांसद बने थे. 1996 में लालू लहर में लालबाबू यादव ने समता पार्टी से चुनाव लड़े अब्दुल गफूर को हराया.1998 में अब्दुल गफूर ने समता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा और राजद के लाल बाबू यादव को पराजित किया. 1999 में समता पार्टी के उम्मीदवार रहे रघुनाथ झा ने जन कांग्रेस के प्रत्याशी काली पांडेय को शिकस्त दी थी. केंद्र में रघुनाथ झा मंत्री भी रहें. 2004 में राजद उम्मीदवार व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साले अनिरुद्ध यादव ने जदयू के प्रभुदयाल सिंह को पराजित किया.

2009 में जदयू के पूर्णमासी राम ने राजद के अनिल कुमार को हरा कर इस सीट पर कब्जा जमाया था. 2014 में बीजेपी के जनक राम ने कांग्रेस के पूर्णमासी राम और जदयू के अनिल राम को हराकर सांसद बने थे. 2019 में राजद के सुरेंद्र महान को हराकर एनडीए प्रत्याशी डॉ आलोक कुमार सुमन सांसद बने हैं. वर्तमान सांसद डॉ आलोक कुमार सुमन इस मिथक को तोड़ पाएंगे. ये 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता ही तय करेगी.

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