महाकुंभ में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम, 48 टॉयलेट और 20,000 कूड़ेदान हुए स्थापित

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव

प्रयागराज: महाकुंभ सिर्फ एक आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का व्यापक अभियान बन गया है। नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने के लिए 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित किए जा रहे हैं, जबकि सलोरी, रसूलाबाद और नैनी में तीन नए एसटीपी के निर्माण कार्य तेज़ी से जारी हैं। इसके अलावा, 37 नालों को पूरी तरह से टैप कर उनके जल का उपचार किया गया है, जिससे गंगा और यमुना की स्वच्छता सुनिश्चित हो रही है। 

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श्रद्धालुओं की सुविधा और मेला क्षेत्र की सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत 12,000 एफआरपी टॉयलेट,16,100 प्रीफैब्रिकेटेड स्टील टॉयलेट, 20,000 सामुदायिक मूत्रालय, 20,000 कूड़ेदान लगाए गए हैं। साथ ही, 37.75 लाख लाइनर बैग का उपयोग किया जा रहा है, ताकि कचरे का उचित निपटान किया जा सके और स्वच्छता बनी रहे। 

महाकुंभ में 1,500 प्रशिक्षित ‘गंगा सेवा दूत’ श्रद्धालुओं को गंगा सफाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। नुक्कड़ नाटक, पोस्टर अभियान और संवाद सत्रों के माध्यम से स्वच्छता को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। नमामि गंगे मिशन के कम्युनिकेशन हेड नजीब अहसन ने बताया कि गंगा की जैव विविधता, स्वच्छता अभियानों और पारिस्थितिकी को आधुनिक तकनीकों से प्रदर्शित किया जा रहा है। 

प्रयाग मंच पर गंगा, यमुना और सहायक नदियों के जल स्तर व गुणवत्ता की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। सीवेज ट्रीटमेंट मॉडल, रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजनाएं, और गांगेय डॉल्फिन की प्रतिकृति श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित कर रही हैं। नमामि गंगे मिशन के तहत निर्मित नए घाटों को सौर ऊर्जा से रोशन, आधुनिक चेंजिंग रूम, और विश्राम स्थलों से लैस किया गया है। यहां नियमित सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे गंगा की निर्मलता और प्रवाह बनाए रखा जा सके। 

पेंट माय सिटी अभियान के तहत प्रयागराज की दीवारों और सार्वजनिक स्थलों को रंगीन चित्रों और पर्यावरण संरक्षण संदेशों से सजाया गया है। इस पहल से सांस्कृतिक और स्वच्छता जागरूकता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा रहा है।  महाकुंभ 2025 के दौरान गंगा टास्क फोर्स, स्वयंसेवी संगठनों और श्रद्धालुओं की मदद से घाटों की सफाई की जा रही है। कचरा प्रबंधन, जल शुद्धिकरण और जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि गंगा हमेशा स्वच्छ और अविरल बनी रहे।

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