आजकल हमारी जिंदगी में ब्लूटूथ जैसी तकनीक इतनी घुल-मिल गई है कि बिना इसके सोचना भी मुश्किल है। सुबह उठकर वायरलेस ईयरबड्स लगाना, कार में फोन से म्यूजिक प्ले करना, स्मार्ट होम डिवाइस जैसे स्पीकर या लाइट्स को कंट्रोल करना—हर जगह ब्लूटूथ की मौजूदगी है। हम रोज़ इसका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कभी सोचते हैं कि इसका नाम “ब्लूटूथ” क्यों पड़ा? यह कोई टेक्निकल शॉर्ट फॉर्म तो नहीं है, और इसका नीला-सफेद लोगो आखिर क्या दर्शाता है?
दरअसल, ब्लूटूथ का नाम किसी वैज्ञानिक फॉर्मूले या मशीन से नहीं जुड़ा, बल्कि करीब 1000 साल पहले के एक वाइकिंग राजा से आया है। वह राजा था हैराल्ड गॉर्मसन, जिन्हें पुरानी नॉर्स भाषा में हाराल्ड ब्लातांड (Harald Blåtand) कहा जाता था। “Bla” का मतलब नीला (या गहरा नीला/काला) और “Tand” का मतलब दांत। इसलिए अंग्रेजी में “Bluetooth” कहते हैं। कहा जाता है कि हैराल्ड के एक दांत में सड़न या कोई समस्या थी, जिसकी वजह से वह गहरा नीला/काला दिखता था कि यही वजह उनके इस उपनाम की। (कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शायद ब्लूबेरी जैसी चीजों से दांत रंगे होंगे, लेकिन आमतौर पर मृत/खराब दांत वाली बात ही मानी जाती है।)
बता दें कि हैराल्ड ब्लूटूथ एक महान योद्धा और एकजुट करने वाले राजा थे। उन्होंने 10वीं सदी में डेनमार्क और नॉर्वे जैसे अलग-अलग इलाकों को एक साथ जोड़ा, शांति स्थापित की और ईसाई धर्म को भी बढ़ावा दिया। 1990 के दशक में मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स तेजी से आ रहे थे, लेकिन वे आपस में तारों से ही जुड़ते थे। बिना तार के, कम दूरी पर, कम पावर में डिवाइस कनेक्ट करने का आइडिया था। एरिक्सन के डॉ. जाप हार्टसेन और उनकी टीम इसी पर काम कर रही थी। 1996-97 में Intel, Ericsson और Nokia जैसी कंपनियां मिलकर एक ग्रुप बना रही थीं (जो बाद में Bluetooth Special Interest Group बना)। नाम तय करने की मीटिंग में Intel के इंजीनियर जिम कार्डाच (Jim Kardach) वाइकिंग इतिहास पर एक किताब पढ़ रहे थे। उन्हें लगा कि जैसे राजा हैराल्ड ने अलग-अलग राज्यों को जोड़ा, वैसे ही यह नई वायरलेस तकनीक अलग-अलग डिवाइस (फोन, कंप्यूटर, आदि) को जोड़ेगी।
मजाक में उन्होंने “Bluetooth” नाम सुझाया और सोचा था कि यह सिर्फ टेम्परेरी कोडनेम है। बाद में कई दूसरे नाम ट्राई किए गए, जैसे PAN (Personal Area Network), लेकिन “PAIN” जैसा सुनने में बुरा लगता था। Radio Wire का ट्रेडमार्क नहीं मिला। इतने में Bluetooth नाम इतना पॉपुलर हो गया कि बदलना मुश्किल हो गया। ब्लूटूथ का नीला-सफेद लोगो भी उसी राजा से जुड़ा है। यह दो पुराने वाइकिंग रून (Younger Futhark runes) को मिलाकर बनाया गया है:
ᚼ (Hagall) → H के लिए
ᛒ (Bjarkan) → B के लिए
यानी हैराल्ड के नाम के शुरुआती अक्षर H और B को रून में जोड़कर बनाया गया है। यह एक तरह से “बाइंड रून” है, जो उनके इनिशियल्स को दर्शाता है। शुरुआत में ब्लूटूथ की रेंज सिर्फ 10 मीटर थी, स्पीड कम थी और मुख्य रूप से फोन कॉल, हैंड्स-फ्री और बेसिक डेटा ट्रांसफर के लिए था। लेकिन आज Bluetooth 5.4 और नए वर्जन जैसे Bluetooth 6.0 (2024 में लॉन्च) और 6.1 (2025 में) आ चुके हैं। अब रेंज सैकड़ों मीटर तक, स्पीड ज्यादा, बैटरी कम खर्च, बेहतर स्टेबिलिटी, हाई-क्वालिटी ऑडियो/वीडियो स्ट्रीमिंग, और IoT डिवाइस के लिए एडवांस फीचर्स हैं। कई फोन में अब 3.5mm जैक तक नहीं होता—सब ब्लूटूथ पर! तो अगली बार जब आप ब्लूटूथ ऑन करें, तो याद रखिएगा—यह सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि एक प्राचीन राजा की विरासत है, जो “जोड़ने” की ताकत का प्रतीक बनी हुई है।