हॉबी सेंटर में बंगीय संगीत परिषद की वार्षिक परीक्षा संपन्न

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव
धनबाद ।
जय प्रकाश नगर,गली न.10 स्थित धनबाद का ख्याति प्राप्त ड्राइंग इंस्टीट्यूट हॉबी सेंटर में रविवार को बांगीया संगीत परिषद का वार्षिक परीक्षा 2024 का आयोजन किया गया। सातवां व आठवां डिप्लोमा परीक्षा में झारखंड बिहार और वेस्ट बंगाल के विद्यार्थियों ने निर्धारित स्टिल लाइव और वाटर कलर से मार्केट सीन, फेस्टिवल एवं अन्य थीम के चित्रण को बहुत ही बारीकी से उकेर कर बहुत ही शानदार चित्रकारियों को कोलकाता से आए जज सुशांत चक्रवर्ती के समक्ष प्रस्तुत किया।

सुशांत चक्रवर्ती ने बताया भारतीय चित्रकारी के इस सुनहरे सफर में देश के साथ बर्लिन, न्यूयॉर्क, फ्रांस मे भी आर्ट और कल्चर के एग्जीबिशन उनके तत्वाधान में देश की कला और संस्कृति के बनाए चित्रों ने एक शानदार छाप छोड़ी है। आज धनबाद के प्रख्यात ड्राइंग इंस्टीट्यूट हॉबी सेंटर में विद्यार्थियों ने बहुत ही सुंदर एवं दमदार चित्रकारी पेश की है जिन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जिसे प्राप्त कर किसी भी संस्थाओं एवं स्कूलों में शिक्षक का जॉब प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

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हॉबी सेंटर के निदेशक एवं ख्याति प्राप्त आर्टिस्ट शिव शंकर घर ने कहा यह परीक्षा बांगिया संगीत परिषद के नियमों एवं निदेर्शानुसार सुचारू रूप से संचालित किया गया है। विद्यार्थियों ने काफी लगन, मेहनत और एकाग्रता के साथ परिपक्त चित्रकरी के गुण सीखे है और अब डिप्लोमा प्राप्त कर वर्तमान और भविष्य में वे हमारे देश के बच्चों को विभिन्न संस्थाओं एवं स्कूलों में गहन चित्रकारी के संदर्भ में बारीकियां का प्रशिक्षण देंगे। परीक्षार्थी करनजीत कौर ने बताया ड्रॉइंग एक करियर ओरिएंटेड अपॉर्चुनिटी है चाहे आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, स्ट्रीम हो, बीएसए हो या आर्किटेक्ट फील्ड हो सभी में ड्राइंग की आवश्यकता पड़ती है।और हॉबी सेंटर से हमलोगों को करियर ओरिएंटेड ड्राइंग ट्रेनिंग मिल रही है। परीक्षा दे रहे हॉबी सेंटर के विद्यार्थी आदित्य ने बताया कि कोई ड्राइंग बनाने में सालों लग जाते है ।

हम मेहनत करते हैं शिवशंकर सर इंप्रूवमेंट करवातें है इस हॉबी सेंटर से हजारों विद्यार्थी हाइ लेवल में गए हैं।शिव शंकर सर के प्रशिक्षण सहयोग से एक दिन हम सभी विद्यार्थी सफलता की उच्चाइयों को छुएंगे।परीक्षा को सफल करने में चित्रकला में विशेष रुचि रखने वाले वरिष्ठ शिक्षकों अंजन आचार्य व नीलांशु भट्टाचार्य का सक्रिय योगदान था।

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