मनरेगा वापसी को लेकर कांग्रेस 8 जनवरी से सड़क पर; राजद साथ नहीं…

Ritu Raj

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और राजद के बीच उभरी खटास अब और गहरी होती दिख रही है। मनरेगा की बहाली की मांग को लेकर 8 जनवरी से शुरू होने जा रहे राज्यव्यापी आंदोलन में कांग्रेस ने राजद से अलग होकर सड़क पर उतरने का फैसला कर लिया है। यही नहीं, कांग्रेस ने यूपीए के अन्य सहयोगी दल—भाकपा, माकपा, भाकपा-माले और वीआईपी—को भी इस आंदोलन से दूर रखने का निर्णय लिया है।

दिलचस्प बात यह है कि पड़ोसी राज्य झारखंड में कांग्रेस के साथ सत्ता साझा कर रही झामुमो सरकार मनरेगा का नाम बदलकर ‘वीबी-जी राम जी’ किए जाने और उसमें किए गए बदलावों के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रही है, जबकि बिहार में यूपीए के घटक दल इस मुद्दे पर एक मंच पर नजर नहीं आ रहे हैं। राजद, भाकपा, माकपा और माले ने भी अपने-अपने बैनर तले मनरेगा के कथित अहम प्रावधानों को खत्म किए जाने के खिलाफ किसी बड़े आंदोलन का ऐलान नहीं किया है। वहीं, कांग्रेस के मनरेगा आंदोलन में ‘एकला चलो’ की नीति अपनाने से साफ हो गया है कि प्रदेश में महागठबंधन के टूटने की औपचारिक घोषणा भर बाकी रह गई है। हालिया समय में यूपीए के साझे मंच से किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम की संभावना नजर नहीं आ रही है। पूर्व कांग्रेस विधायक दल नेता शकील अहमद खां पहले ही राजद के साथ गठबंधन को कांग्रेस के लिए नुकसानदेह बता चुके हैं, जिस पर राजद की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी सामने आई थी।

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हालांकि, अब स्थिति यह है कि केवल कांग्रेस और राजद ही नहीं, बल्कि यूपीए के अन्य घटक दलों का नेतृत्व भी अलग राह पर चलने का मन बना चुका है। मनरेगा के प्रावधानों में बदलाव और वीबी-जी राम जी लागू किए जाने के विरोध में कांग्रेस 11 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों में महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष दिनभर का उपवास करेगी। इसके साथ ही आगामी विधानसभा सत्र के दौरान मनरेगा की बहाली की मांग को लेकर विधानसभा घेराव की योजना भी बनाई जा रही है। पार्टी स्तर पर एक बड़ी रैली के आयोजन पर भी विचार चल रहा है। आंदोलन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए 8 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है। 10 जनवरी को सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होंगी। दिल्ली नेतृत्व के निर्देश पर मनरेगा आंदोलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। आंदोलन को धार देने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाएंगे, जबकि 30 जनवरी को शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर और ग्रामीण इलाकों में प्रखंड स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

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