नीतीश कुमार के बेटे का सांसद ने राजनीति में किया स्वागत, जेडीयू ने भी तोड़ी चुप्पी

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव

पटना: केंद्रीय मंत्री रामदास अठालवे ने हाल ही में नीतीश कुमार के बेटे के राजनीति में आने को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार के बेटे राजनीति में आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात को लेकर खुशी जाहिर की और कहा कि यह एक अच्छा कदम होगा। मंत्री ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि यह राजनीति में परिवार के योगदान का सकारात्मक संकेत हो सकता है।

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नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश को लेकर जेडीयू ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि, “निशांत के राजनीति में आने की खबरों पर ना तो नीतीश कुमार की कोई प्रतिक्रिया सामने आई है और ना ही निशांत ने इस पर कोई विचार व्यक्त किया है। यह उन लोगों का मामला है जो 2025 से 2030 तक नीतीश कुमार की सत्ता की स्थिति पर विचार कर रहे हैं। वे जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उन्हें उठाते रहें, नीतीश कुमार अपने रास्ते पर चलते रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “नीतीश कुमार न कुछ कहते हैं, न कुछ करते हैं, फिर भी उनके बारे में खबरें बनती रहती हैं। बिहार की राजनीति में सब कुछ नीतीश कुमार से ही जुड़ा हुआ है, चाहे वह मुस्कुराएं या न मुस्कुराएं, यह खबर बन ही जाती है।”

इसके साथ ही अठालवे ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कुंभ मेले पर दिए गए बयान का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने खड़गे को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। अठालवे का कहना था कि इतने वर्षों बाद कुंभ आया है, और इस पर किसी के टिप्पणी करने से बचना चाहिए। “कुंभ का आयोजन हमारे समाज के लिए महत्वपूर्ण है, इस पर सबकी अपनी राय है, और इसे लेकर किसी को आपत्ति नहीं करनी चाहिए,” अठालवे ने अपने बयान में जोर दिया।

वक्फ बिल को लेकर अठालवे ने कहा कि यह बिल मुसलमानों के लिए लाया गया है और इससे उन्हें कई लाभ मिलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस बिल से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा और केंद्र सरकार की मंशा सभी समुदायों को लाभ पहुंचाने की है। राहुल गांधी के संविधान बचाओ अभियान पर भी अठालवे ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को कोई खत्म नहीं कर सकता। भारत में किसी के पास इतनी ताकत नहीं है कि वह हमारे संविधान को बदल सके। राहुल गांधी कार्यक्रम कर सकते हैं, लेकिन अंबेडकर का संविधान हमेशा जीवित रहेगा।”

अठालवे का यह बयान राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाला था, और इसके बाद राजनीति में नए मुद्दों पर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठालवे ने कहा कि,”भीमराव अंबेडकर का संविधान किसी के हाथ में नहीं है, और राहुल गांधी को समझना चाहिए कि हम उनके संविधान की रक्षा करेंगे।”

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