जानिए, दिल्ली चुनाव और संसद छोड़-छाड़ कर 20 दिनों में दूसरी बार पटना क्यों आ रहे राहुल

जगलाल चौधरी जयंती समारोह में राहुल के हिस्सा लेने के पीछे की कहानी

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव

पटना: आज दिल्ली में चुनाव है और आज राहुल गांधी बिहार में हैं। ऐसा क्या हो गया कि दिल्ली में वोटिंग के दिन राहुल गांधी को अचानक से बिहार आना पड़ गया। इसकी वह वजह नहीं है जो बताई जा रही है, बल्कि वजह बहुत बड़ी और चौंकाने वाली है। सच यह है कि राहुल गांधी पांच फ़रवरी को बिहार आने वाले हैं, इसकी खबर बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को भी नहीं थी। इसकी खबर कांग्रेस के बड़े नेताओंं को भी नहीं थी, लेकिन इसकी खबर नीतीश सरकार के एक डीजी रैंक के आईपीएस अधिकारी को थी और उनके भाई को थी।

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दरअसल, अंदर की कहानी यह है कि राहुल गांधी कल जो बिहार आने वाले हैं इसके पीछे डीजी रैंक के आईपीएस अधिकारी एके आंबेडकर और उनके भाई हैं। सूत्रों की मानें, तो एके आंबेडकर चंद महीनों बाद बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी हो सकते हैं।

इस कयास को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंंकि एके आंबेडकर के भाई विनोद चौधरी और बिहार कांग्रेस के सह प्रभारी सुशील पासी ही वे शख्स हैं जो राहुल गांधी को बिहार लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालत यह थी कि राहुल गांधी को कल बिहार आना था और बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश सिंह को खबर तक नहीं थी।

सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश सिंह ने इस पर नाराज़गी भी जताई और तब जाकर डैमेज कंट्रोल करते हुए आज अखिलेश सिंह और सुरेश पासी ने एक साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। प्रेस कॉन्फ़्रेस के दौरान भी अखिलेश सिंह से नाराज़गी छिपाए नहीं छिपी। अखिलेश सिंह ने कह ही डाला कि सुरेश पासी ही राहुल गांधी को बिहार ला रहे हैं। बता दें कि राहुल गांधी स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी के जयंती समारोह में हिस्सा लेने पटना आ रहे हैं। वे महज 20 दिन में दूसरी बार पटना आ रहे हैं। जगलाल चौधरी स्वतंत्रता सेनानी और दलित नेता थे। उन्हें बिहार का गांधी कहा जाता था। वे आबकारी मंत्री थे बिहार में और उन्होंने बिहार में शराबबंदी लागू की थी।

यह भी कहा जा रहा है कि राहुल गांधी जो 20 दिनों में दो बार बिहार आए हैं, इसके पीछे बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को नापसंद करने वाले कांग्रेसियों का गुट है। ये लोग नहीं चाहते कि अखिलेश सिंह बिहार कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहें, इनका मानना है कि अखिलेश सिंह के राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से करीबी संबंध हैं, इसलिए अगर अखिलेश सिंह बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहते हैं, तो कांग्रेस राजद की पिछलग्गू बनी रहेगी। हालांकि, अखिलेश सिंह को निबटाना इतना आसान नहीं है। अखिलेश सिंह जनबल, बाहुबल, धनबल हर तरह से बिहार कांग्रेस में सबसे मज़बूत हैं। उनके राहुल गांधी से भी बेहद मज़बूत रिश्ते हैं।

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