सिटी पोस्ट लाइव : चार महिना पहले सिटी पोस्ट लाइव की टीम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गावं पहुंची थी.मकसद था निशांत के राजनीति में आने की संभावनाओं को टटोलना.नीतीश कुमार के गावं के लोगों ने एक स्वर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके पुत्र निशांत कुमार को अपना राजनीतिक उतराधिकारी घोषित करने की मांग की.नीतीश कुमार के दोस्तों ने कहा -नीतीश जी अपने बिहार के लिए बहुत कुछ किया है.अब निशांत कुमार को CM बनाइये.कल्याण बीघा के लोगों का कहना है कि निशांत कुमार नीतीश कुमार से भी आगे जायेगें.अगर आज CM बने तो एक दिन PM भी बन सकते हैं.
अब तो नीतीश कुमार की उम्र को देखते हुए पार्टी में भी निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग जोर पकड़ रही है. पहले तो कोई कोई नेता ही इस बारे में खुलकर बोलता था.लेकिन अब पार्टी में निशांत कुमार को लेकर एक राय बनने लगी है.पार्टी का मानना है कि निशांत कुमार ही नीतीश कुमार के स्वभाविक राजनीतिक वारिश हो सकते हैं.उनके बाद पार्टी को निशांत कुमार ही आगे बढ़ा सकते हैं. नीतीश कैबिनेट के मंत्री अशोक चौधरी पिछले एक साल से निशांत कुमार को सक्रीय राजनीति में लाने की हिमायत कर रहे हैं.जब नीतीश कुमार ने उनकी बात नहीं मानी तो फेसबुक पर अपने गुस्से का खुल्लेयाम इजहार भी कर दिया.गुस्से का कारण तो नहीं बताया लेकिन समझने वाले समझ गये.ये गुस्सा नहीं बल्कि नीतीश कुमार के लिए उनका प्रेम है.
अब निशांत कुमार) राजनीति में शामिल होने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ग्रीन सिग्नल मिलाने का इंतजार है. सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार को निशांत के राजनीति में प्रवेश के बारे में पार्टी कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग के बारे में बताया गया है .अब आखरी फैसला उनको ही लेना है. एक वर्ष से लगातार निशांत कुमार का नाम सक्रिय राजनीति में आने को लेकर सुर्खियों में रहा है.हालांकि, शुरुआती दौर में पार्टी (जेडीयू) ने इसको लेकर हमेशा मना किया है. जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने तो ऐसी किसी भी बात को सीधे तौर पर खारिज भी कर दिया था और इसको उतना महत्व नहीं दिया. लेकिन, समय-समय पर निशांत कुमार के नाम की चर्चा राजनीति में आने को लेकर लगातार होती ही रही है.
अब जब हाल ही में निशांत कुमार ने स्वयं यह अपील की कि अगर संभव हो तो कृपया जेडीयू और मेरे पिता को वोट दें और उन्हें फिर से वापस लाएं, यह पार्टी के लिए पहली बार उनकी सार्वजनिक अपील थी. जाहिर तौर पर अब इस बात की चर्चा होने लगी है कि उन्होंने भी संभवत: अपना मन राजनीति में आने को लेकर बना लिया है.निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की चर्चा ने पहली बार तब जोर पकड़ा था, जब वर्ष 2015 में वह अपने पिता के शपथ ग्रहण समारोह के समय देखे गए थे. इस बीच एक सप्ताह पहले ही जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने उनके (निशांत कुमार) राजनीति में आने को लेकर कुछ संकेत भी दिए थे. तब उन्होंने कहा था कि निशांत के बयान का स्वागत करते हैं और उन्हें मौजूदा सरकार की अच्छी समझ है. यह पूछे जाने पर की क्या निशांत को राजनीति में शामिल होना चाहिए, तब सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से आने वाले मंत्री ने कहा था कि बेशक ऐसे प्रगतिशील विचारों वाले युवाओं का राजनीति में स्वागत है, सही समय पर फैसला लिया जाएगा.
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार परिवारवादी और वंशवादी राजनीति की आलोचना करते रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस बात (परिवारवादी राजनीति के विरोध) को लेकर अक्सर तारीफ भी करते रहे हैं. यहां खास बात यह भी कि नीतीश कुमार लगातार राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ परिवारवाद का मुद्दा भी उठाते रहे हैं. अब ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कि क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को सक्रिय राजनीति में आने का की इजाजत देंगे? बहरहाल, फिलहाल जदयू सूत्रों की मानें तो वह (निशांत कुमार) अब राजनीति में आने को तैयार हैं और बस इंतजार होली का है.
निशांत कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिवंगत मंजू सिंह के इकलौते बेटे हैं. वर्ष 2013 में लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे तेजस्वी प्रताप यादव को पार्टी के अगले नेता के रूप में पेश कर दिया था. रामविलास पासवान ने भी लगभग इसी समय में अपने बेटे चिराग पासवान को राजनीति में सामने लाया था. यह चिराग पासवान ही थे जिन्होंने 2014 के चुनाव में लोजपा को एनडीए के साथ लाने में अहम भूमिका निभाई थी. चिराग पासवान के एक फैसले ने लोजपा की किस्मत बदल दी.ठीक इसी तरह तेजस्वी यादव ने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को अपनी मेहनत की बदौलत 110 सीटों पर पहुंचा दिया था. बहुमत से केवल वह 12 सीटें दूर रह गए थे.
अगर निशांत कुमार भी एक दशक पहले राजनीति में शामिल हो गए होते तो नीतीश कुमार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी होते. हालांकि, अभी भी बहुत देर नहीं हुई है. निशांत कुमार के भविष्य के लिए अपने पाले में लाने की जरूरत है. निशांत पर हो रही चर्चा के बी राजनीति के जानकार भी इसे जेडीयू के लिए सकारात्मक बदलाव के तौर पर देख रहे हैं.नीतीश कुमार भले परिवारवाद के खिलाफ रहे हों लेकिन पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं की मांग पर तो उन्हें विचार करना ही पड़ेगा.खास बात ये है कि निशांत का विवादों से कभी कोई रिश्ता नहीं रहा.वो पढ़े-लिखे और पिता की तरह ही इंजिनियर हैं.