मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू

9 फरवरी को CM बीरेन सिंह ने दिया था पद से इस्तीफा

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव

पटना। मणिपुर में अब राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। गृह मंत्रालय ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने की सूचना दी है। इससे पहले, 9 फरवरी को राज्य के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उन्होंने राज्य में लगभग दो साल से जारी जातीय हिंसा के बाद दिया। इन घटनाओं और अन्य मुद्दों के चलते बीरेन सिंह को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। उनके इस्तीफे के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब राज्य की सत्ता राज्यपाल के अधीन आ जाएगी। मणिपुर की विधायिका निलंबित या भंग हो सकती है, और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सीधे हस्तक्षेप कर सकता है। बता दें कि राष्ट्रपति शासन के दौरान शांति व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्यपाल की होती है, जो केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत काम करेंगे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सीधे राज्यपाल के नियंत्रण में रहेंगे, और अगर जरूरत पड़ी, तो केंद्र सरकार अर्धसैनिक बलों या सेना की तैनाती भी कर सकती है।

मणिपुर में कौन भड़का रहा है हिंसा?

मणिपुर में पिछले 19 महीनों से हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। इस दौरान सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। हाल ही में मणिपुर से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। राजनेताओं से लेकर फिल्मी हस्तियों तक, सभी ने इस वीडियो की कड़ी निंदा की है। यह वीडियो मणिपुर में चल रही हिंसा से जुड़ा बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि मणिपुर में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई? आखिर वहां ऐसा क्या हुआ कि लोग इतने आक्रोशित हो गए?

मैतेई और कुकी समुदाय के बीच टकराव

19 अप्रैल को मणिपुर उच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी किया, जिसमें राज्य के बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की बात कही गई। अदालत ने राज्य सरकार को 10 साल पुरानी सिफारिश को लागू करने का निर्देश दिया था, जिसमें मैतेई समुदाय को जनजाति में शामिल करने की बात थी। इस आदेश के बाद मैतेई और कुकी समुदाय के बीच तनाव बढ़ने लगा और देखते ही देखते यह संघर्ष हिंसक रूप ले लिया।

कुकी समुदाय का विरोध और जवाबी प्रतिक्रिया

इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे कुकी समुदाय के बीच यह संघर्ष पहचान की राजनीति को लेकर शुरू हुआ। कुकी समुदाय ने उच्च न्यायालय के इस फैसले का विरोध किया, क्योंकि उन्हें डर था कि मैतेई समुदाय को आरक्षण मिलने से उनके लिए शैक्षणिक और सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित हो जाएंगे। इसके जवाब में मैतेई समुदाय ने भी आक्रामक रुख अपनाया और यह विरोध हिंसक झड़पों में बदल गया।

मणिपुर की जनसंख्या और जातीय समीकरण

मणिपुर राज्य कुल 16 जिलों में बंटा हुआ है, जो मुख्यतः दो हिस्सों में विभाजित हैं—इंफाल घाटी और पहाड़ी जिले। इंफाल घाटी में मैतेई समुदाय का बहुमत है, जबकि पहाड़ी जिलों में नागा और कुकी जनजातियों का वर्चस्व है। राज्य की कुल आबादी लगभग 28 लाख है, जिसमें मैतेई समुदाय 53% है और वे भूमि के मात्र 10% हिस्से पर निवास करते हैं। दूसरी ओर, कुकी समुदाय राज्य की कुल आबादी का 30% है और वे मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।

आरक्षण विवाद की जड़

कुकी समुदाय का कहना है कि यदि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल जाता है, तो उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल जाएगा, जिससे कुकी समुदाय के अवसर सीमित हो जाएंगे। मैतेई समुदाय पिछले 10 वर्षों से आरक्षण की मांग कर रहा है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण मैतेई जनजाति समिति ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश के बाद ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए।

कैसे स्थापित होगी मणिपुर में शांति?

मणिपुर में जातीय संघर्ष के कारण हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच बढ़ती दूरी को पाटने और राज्य में शांति बहाल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर प्रयास करने होंगे। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक इच्छाशक्ति और आपसी समझ के साथ मणिपुर में शांति स्थापित की जा सकेगी?

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