बिहार कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष और बगावत का माहौल गहराता जा रहा है। पार्टी के कई नाराज और समर्पित कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व से खफा हैं और 17 मार्च 2026 को पटना में एक बड़ा महासम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुटे हैं। इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क यात्रा का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है।
जनसंपर्क यात्रा का विवरण;
1) पहला चरण पहले ही पूरा हो चुका है, जिसमें भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद और अरवल जिलों का दौरा किया गया। इन जिलों में कांग्रेसियों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
2) दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है, जिसमें नालंदा और नवादा से शुरुआत होगी। इसके बाद निम्नलिखित जिलों में संपर्क अभियान चलेगा:
शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बांका, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, खगड़िया, बेगूसराय और समस्तीपुर।
पूरे बिहार से निष्ठावान और असंतुष्ट कांग्रेसियों को इस महासम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है।
प्रमुख नेताओं के बयान;
– पूर्व विधायक छत्रपति यादव (खगड़िया) ने बताया कि अब तक की जनसंपर्क यात्रा बेहद उत्साहजनक रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अपार समर्थन मिल रहा है, और संगठन को मजबूत करने के लिए यह प्रयास जारी है।
– अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) सदस्य आनंद माधव ने आरोप लगाया कि जिलों में उनकी सफलता से घबराकर प्रदेश कांग्रेस ने कार्यालय आदेश जारी किया है, जिसमें जिला पदाधिकारियों को असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का सहयोग न करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिला कांग्रेस के अधिकारी कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं, और ऐसे आदेश पार्टी की एकता के खिलाफ हैं।
महासम्मेलन की तैयारी और विवाद;
यह महासम्मेलन सदाकत आश्रम (पटना) में आयोजित करने की योजना है। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को पत्र भेजा गया था, लेकिन उनके कार्यालय ने पत्र लेने से इनकार कर दिया। बाद में पत्र वाट्सएप पर भेजा गया और स्पीड पोस्ट से भी। यदि सदाकत आश्रम नहीं मिला, तो वैकल्पिक स्थान पर सम्मेलन होगा। नाराज कांग्रेसियों का कहना है कि बिहार में पार्टी की स्थिति सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है। वे संगठन को बचाने, पुरानी जमीनी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और नई कांग्रेस बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। कुछ नेता प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और अध्यक्ष राजेश राम पर टिकट वितरण में धांधली, उपेक्षा और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने असंतुष्ट गुट पर कार्रवाई की चेतावनी दी है और उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों का दोषी ठहराया है। इस घटनाक्रम से बिहार कांग्रेस में गुटबाजी और संघर्ष और तेज हो गया है।