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गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने अपने जीवन के संघर्षों को याद करते हुए भावुक होकर अपने पिता के अपमान का जिक्र किया। कथा के बीच उन्होंने अपनी गरीबी, समाज में झेले गए अपमान और कठिनाइयों का उल्लेख किया, जिससे वहां मौजूद भक्त भी भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए।
कपड़ों की वजह से घर नहीं बुलाते थे लोग
बाबा बागेश्वर ने कहा कि उनका परिवार बेहद साधारण स्थिति में था और लोगों ने उनके साथ भेदभाव किया। उन्होंने बताया कि लोग उनके पिता को सम्मान नहीं देते थे, और उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कोई उन्हें अपने घर बुलाने तक से कतराता था। शादी-विवाह में भी निमंत्रण नहीं दिया जाता था क्योंकि उनके कपड़े पुराने और फटे होते थे। उन्होंने कहा, “हमारे कपड़ों को देखकर लोग हमें अपने घर बुलाने से डरते थे, उन्हें लगता था कि हमारी उपस्थिति उनकी इज्जत पर असर डालेगी।”
बाबा बागेश्वर जब अपने पिता के अपमान की बात कर रहे थे, तो उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, “हमारा इतना अपमान हुआ कि कई बार हमें रोना आता था।” हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां ने हमेशा उन्हें भगवान श्रीराम और बालाजी पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी।

भगवान की कृपा हो, तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता
बाबा बागेश्वर ने कहा कि गरीबी और समाज के तिरस्कार के बावजूद उन्होंने आस्था और धैर्य नहीं खोया। उन्होंने बिहार के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “दुनिया अमीरों को पहचानती है, लेकिन जो भगवान बालाजी के चरणों को पकड़ लेता है, वह कभी असहाय नहीं होता। भगवान की कृपा हो, तो कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
उन्होंने श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जो भी धर्म और मानवता के मार्ग पर चलता है, उसे एक दिन सफलता जरूर मिलती है।

बाबा के बिहार दौरे पर सियासी हलचल तेज
बाबा बागेश्वर की हनुमंत कथा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए, लेकिन इस दौरान राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला। जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव ने बाबा बागेश्वर को “फ्रॉड” और “नटवरलाल” बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं, आरजेडी विधायक चंद्रशेखर ने भी बाबा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे समाज में नफरत फैलाने का कार्य कर रहे हैं और उन्हें जेल में डाल देना चाहिए।
बाबा बागेश्वर की कथा से जहां लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिली, वहीं इसने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया। बिहार में उनके दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। आलोचनाओं के बावजूद, उनके प्रति लोगों की आस्था कम नहीं हुई और हनुमंत कथा में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। अब देखना यह होगा कि बाबा बागेश्वर के इस दौरे के बाद बिहार में उनकी लोकप्रियता और विवादों का सिलसिला किस दिशा में जाता है।
श्रद्धालुओं की अपार आस्था
विवादों के बावजूद, बाबा बागेश्वर के भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गोपालगंज में हुए इस आयोजन में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया और पांच दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में सनातन धर्म के एकता का संदेश दिया गया। बाबा बागेश्वर ने कथा के दौरान लोगों से जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज में प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की अपील की।