बजट 2026 की आहट के साथ ही यह चर्चा तेज हो गई है कि देश की अर्थव्यवस्था का पहिया कैसे घूमेगा। आम आदमी के लिए बजट का मतलब टैक्स में छूट या महंगाई से राहत हो सकता है, लेकिन इसका गणित काफी दिलचस्प है।

पैसा आता कहां से है? (कमाई के स्रोत)
| स्रोत | हिस्सा (प्रति ₹1 में) |
| उधारी और अन्य देनदारियां | 24 पैसे |
| आयकर (Income Tax) | 22 पैसे |
| GST और अन्य कर | 18 पैसे |
| कॉरपोरेट टैक्स | 17 पैसे |
| नॉन-टैक्स रेवेन्यू (फीस, डिविडेंड) | 09 पैसे |
| केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) | 05 पैसे |
| सीमा शुल्क (Customs Duty) | 04 पैसे |
| गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां (जैसे विनिवेश) | 01 पैसा |
कमाई के मुख्य स्तंभ:
डायरेक्ट टैक्स: इसमें आपकी सैलरी पर लगने वाला इनकम टैक्स और कंपनियों के मुनाफे पर लगने वाला कॉरपोरेट टैक्स शामिल है।
इनडायरेक्ट टैक्स: इसमें जीएसटी (GST) सबसे बड़ा हिस्सा है, जो आप हर छोटी-बड़ी चीज खरीदने पर देते हैं।
नॉन-टैक्स रेवेन्यू: सरकारी सेवाओं की फीस, चालान, और सरकारी कंपनियों (PSUs) से मिलने वाला मुनाफा।
उधारी: जब खर्च ज्यादा और कमाई कम होती है, तो सरकार बॉन्ड्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज लेती है।

पैसा जाता कहां है? (कमाई के स्रोत)
| मद (खर्च का क्षेत्र) | हिस्सा (प्रति ₹1 में) |
| राज्यों का हिस्सा (कर और शुल्क) | 30 पैसे |
| ब्याज भुगतान (पुराने कर्ज पर) | 20 पैसे |
| केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं | 16 पैसे |
| रक्षा (Defense) | 08 पैसे |
| केंद्र प्रायोजित योजनाएं | 08 पैसे |
| सब्सिडी (खाद, भोजन, आदि) | 06 पैसे |
| पेंशन | 04 पैसे |
| अन्य खर्च | 08 पैसे |
खर्च की प्राथमिकताएं;
– राज्यों की हिस्सेदारी: सरकार अपनी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा राज्यों को देती है ताकि वहां विकास कार्य हो सकें।
– कर्ज का बोझ: सरकार ने पहले जो कर्ज लिए हैं, उनका ब्याज चुकाना एक अनिवार्य खर्च है, जिसे टाला नहीं जा सकता।
– योजनाएं और सब्सिडी: गरीबों के लिए चलाई जा रही स्कीम्स और सब्सिडी पर भी एक महत्वपूर्ण राशि खर्च होती है।