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पटना। अखिलेश प्रसाद सिंह का नाम बिहार की राजनीति में बड़ा रहा है। वे लोकसभा सांसद रह चुके हैं, दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं और केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल चुके हैं। लेकिन अब वे बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बन गए हैं। उनकी जगह अब राजेश कुमार ने ले ली है। राजेश कुमार को बिहार कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। यह पद अपने आप में बेहद अहम है, खासकर तब जब बिहार विधानसभा चुनाव में केवल सात महीने बचे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर राजेश कुमार कौन हैं? कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी? दरअसल, राजेश कुमार औरंगाबाद के कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। वे दलित समुदाय से आते हैं। कांग्रेस ने उन्हें अध्यक्ष बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी सभी वर्गों को समान अवसर दे रही है। कांग्रेस पर यह आरोप लगता रहा है कि दलितों को केवल कार्यकर्ता के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि शीर्ष नेतृत्व भूमिहार और ब्राह्मण नेताओं को सौंपा जाता है।
चार बार विधायक रह चुके हैं पिता
पिछले कुछ वर्षों में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं के बढ़ते प्रभाव के कारण दलित मतदाता कांग्रेस से दूर होते गए हैं। राजेश कुमार के नेतृत्व में कांग्रेस इस वर्ग को दोबारा अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ अध्यक्ष बदलने से दलित वोटर कांग्रेस के करीब आएंगे? राजेश कुमार के राजनीतिक सफर की बात करें तो वे बिहार सरकार के पूर्व मंत्री दिवंगत दिलकेश्वर राम के बेटे हैं। उनके पिता चार बार विधायक रह चुके थे और 1985 में बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने थे। गरीबों के लिए किए गए उनके कार्यों की वजह से वे दलित समाज में लोकप्रिय थे।
राजेश कुमार ने 2015 के विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रत्याशी संतोष मांझी को 10,000 वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि, 2010 में कांग्रेस के टिकट पर वे चुनाव हार गए थे, लेकिन 2020 में उन्होंने वापसी की और कुटुंबा सीट से विधायक बने। वे पिछले 10 वर्षों से कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा, वे सत्तारूढ़ दल के सचेतक पद पर भी काम कर चुके हैं।
शिक्षा की बात करें तो राजेश कुमार ने हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है। उनके परिवार में उनकी पत्नी रेखा दास और दो बेटे, सोनू कुमार और बॉबी कुमार हैं। फिलहाल, राजेश कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के खोए हुए दलित समर्थन को वापस लाने की होगी। बिहार कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के बाद वे इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।