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नई दिल्ली: खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 ने न केवल खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को मंच दिया, बल्कि यह उन कहानियों का भी गवाह बना, जो संघर्ष, आत्मबल और संकल्प से भरी हुई हैं। इस प्रतियोगिता के सातवें दिन, पावरलिफ्टिंग में पूर्व पदक विजेताओं ने अपनी क्षमताओं का परिचय दिया, वहीं टेबल टेनिस में भी रोमांचक मुकाबले देखने को मिले।
टेबल टेनिस में एकता भयान की उपलब्धि
पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिता में हरियाणा की एकता भयान ने तमिलनाडु की दीपिका रंज रामनाथन को 3-2 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। 2020 टोक्यो पैरालंपिक में क्लब थ्रो इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली एकता ने कहा, “पेरिस 2024 में क्लब थ्रो नहीं होने के कारण मैंने टेबल टेनिस को अपनाया और यह मेरे लिए एक बड़ी चुनौती थी। यह मेरा पहला खेलो इंडिया पैरा गेम्स था, और यह एक शानदार अनुभव रहा।”

पावरलिफ्टिंग में जुनून और मेहनत की मिसाल
हरियाणा के प्रदीप जून ने 107+ किलोग्राम वर्ग में 194 किलोग्राम भार उठाकर लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2021 में एक गंभीर चोट के कारण उन्हें अपने पैर से हाथ धोना पड़ा, लेकिन उनकी हिम्मत और जुनून ने उन्हें पावरलिफ्टिंग में एक नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा, “चोट के बाद छह महीने तक मैं निराश था, लेकिन परिवार और दोस्तों के सहयोग से मैंने पावरलिफ्टिंग को अपनाया।”
दिल्ली की साहिस्ता ने भी अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान आकर्षित किया। 79 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने 81 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। बचपन में एक गलत इंजेक्शन से उनके घुटने को स्थायी क्षति पहुंची, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, “शुरुआत में मैं सिर्फ बाइसेप्स बनाना चाहती थी, लेकिन पैरा पावरलिफ्टिंग मेरी प्रेरणा बन गई। अब मेरा लक्ष्य पैरालिंपियन बनना है।”
अन्य पदक विजेता
पुरुषों के 107 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र के दिनेश बागड़े ने 157 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण जीता, जबकि महिलाओं के 86 किलोग्राम वर्ग में तमिलनाडु की अरुणमोली अरुणगिरी ने 80 किलोग्राम भार उठाकर जीत दर्ज की।
केआईपीजी 2025 में अब तक 170 स्वर्ण पदक तय हो चुके हैं, जिसमें हरियाणा 31 स्वर्ण पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश क्रमशः 26 और 22 स्वर्ण पदकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। यह प्रतियोगिता सिर्फ खेलों का उत्सव नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों की कहानियों का मंच भी है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए सफलता का परचम लहराया है।