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नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड के सरथा पंचायत स्थित पासवान नगर गांव से एक युवक पिछले तीन महीनों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता है। लापता युवक की पहचान वैशाली जिले के रोस्तमपुर गांव निवासी धर्मेंद्र पासवान के रूप में हुई है, जो अपने ससुराल पासवान नगर में पत्नी और पांच छोटे बच्चों के साथ रहते थे और पटना रेलवे स्टेशन पर कुली का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
परिजनों के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले धर्मेंद्र के बच्चे अचानक बीमार हो गए थे। इस दौरान इलाज के लिए पैसे की आवश्यकता थी, जिसके चलते वह कमाई के बहाने घर से निकले, लेकिन उसके बाद से वह कभी वापस नहीं लौटे। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।

पत्नी मुन्नी देवी, जो अब अपने पांच बच्चों के साथ असहाय स्थिति में हैं, ने पटना रेलवे थाना में पति की गुमशुदगी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही स्थानीय वेना थाना को भी मामले की सूचना दी गई है। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी अब तक धर्मेंद्र का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
परिवार वालों को अब किसी अनहोनी की आशंका सता रही है। मुन्नी देवी का कहना है कि धर्मेंद्र कभी बिना बताए इतने लंबे समय तक घर से नहीं रहते थे।
बच्चे हर दिन दरवाजे की ओर टकटकी लगाए अपने पिता की राह देख रहे हैं, लेकिन समय के साथ उनकी उम्मीदें भी टूटने लगी हैं। धर्मेंद्र की पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। न तो किसी संस्था से सहायता मिल रही है और न ही पुलिस की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
स्थानीय समाजसेवियों और प्रशासन से परिवार ने गुहार लगाई है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और धर्मेंद्र को जल्द से जल्द खोजा जाए। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या ऐसे ग़रीब और मजदूर वर्ग के लोगों की सुरक्षा और गुमशुदगी के मामलों पर प्रशासन उतनी ही गंभीरता दिखाता है, जितनी अपेक्षित है?