BJP विधायक मिश्रीलाल यादव को मारपीट के 6 साल पुराने मामले में दो साल की सजा, विधानसभा सदस्यता पर संकट

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के दरभंगा जिले की एक विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक मिश्रीलाल यादव को छह साल पुराने एक मारपीट के मामले में दो साल की सजा सुनाई है। यह फैसला मंगलवार को सुनाया गया। अदालत ने विधायक के साथ-साथ उनके सहयोगी सुरेश यादव को भी दोषी करार दिया है और दोनों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह मामला वर्ष 2019 का है। 29 जनवरी 2019 की शाम को दरभंगा के समैला गांव के निवासी उमेश मिश्रा ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, वह अपने घर के बाहर खड़े थे तभी विधायक मिश्रीलाल यादव अपने कुछ समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और बिना किसी उकसावे के उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। उमेश मिश्रा ने विधायक और सुरेश यादव को सीधे तौर पर इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिसे चिकित्सकीय प्रमाण भी मिले।

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शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की और मामला अदालत में पहुंचा। पहले इस केस की सुनवाई निचली अदालत में हुई, जहां फरवरी 2024 में विशेष न्यायाधीश सह अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट करुणा निधि प्रसाद आर्य ने विधायक और सुरेश यादव को तीन-तीन महीने की कैद और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ विधायक मिश्रीलाल यादव ने ऊपरी अदालत में अपील दाखिल की। वहीं, पीड़ित उमेश मिश्रा ने भी अदालत में एक याचिका दाखिल करते हुए यह कहा कि अपराध गंभीर है और सजा बहुत कम दी गई है। उन्होंने मांग की कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। इसके बाद मामला एमपी/एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया, जहां इसकी दोबारा सुनवाई हुई।

अंततः अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। उन्होंने विधायक और उनके सहयोगी की अपील को खारिज करते हुए तीन महीने की सजा को बढ़ाकर दो साल कर दिया। साथ ही प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। इस फैसले के बाद विधायक मिश्रीलाल यादव की विधानसभा सदस्यता पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार, यदि किसी विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। हालाँकि इस विषय में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

गौरतलब है कि मिश्रीलाल यादव पिछले कई वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और इस तरह का गंभीर आपराधिक मामला पहली बार उनके खिलाफ सामने आया है। यह मामला अब न केवल उनकी राजनीतिक छवि के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि उनकी विधायकी भी खतरे में पड़ सकती है। राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा पार्टी नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या मिश्रीलाल यादव कोई अगली कानूनी राहत लेने की कोशिश करते हैं।

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